डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्र सरकार लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को लेकर एक बड़ा कदम उठाने पर विचार कर रही है। सरकार इस बात की संभावनाओं को खंगाल रही है कि क्या इस कानून को जनगणना के बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया से पहले ही लागू किया जा सकता है। परिसीमन से पहले कर सकती है लागू संविधान संशोधन की आवश्यकता वर्तमान कानून यानी 106वां संविधान संशोधन अधिनियम, जिसे सितंबर 2023 में राष्ट्रपति की मंजूरी मिली थी, में यह प्रविधान है कि आरक्षण केवल परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही प्रभावी होगा। यदि सरकार इसे परिसीमन से पहले लागू करने का निर्णय लेती है, तो उसे संसद में एक और संविधान संशोधन विधेयक लाना होगा।हालांकि अभी कैबिनेट के लिए कोई औपचारिक प्रस्ताव तैयार नहीं किया गया है, लेकिन अनौपचारिक स्तर पर विपक्ष के नेताओं से इस बारे में चर्चा की खबरें आ रही हैं। परिसीमन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण किया जाता है।इसके लिए एक 'तटस्थ' परिसीमन आयोग का गठन किया जाता है, जिसके निर्णयों को अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती। जानकारों का मानना है कि चुनाव आयोग एक या दो राज्यों (जैसे हाल ही में असम) का परिसीमन तो कर सकता है, लेकिन अखिल भारतीय स्तर पर यह जिम्मेदारी परिसीमन आयोग की ही होती है। सीटों के निर्धारण के लिए 'रोटेशन' का विकल्प परिसीमन के बिना सीटों का आरक्षण तय करना एक बड़ी चुनौती है। इसके विकल्प के रूप में 'रोटेशन प्रणाली' पर विचार किया जा सकता है।महिला आरक्षण का प्रयास 1990 के दशक के मध्य में गीता मुखर्जी समिति ने सुझाव दिया था कि हर चुनाव के बाद आरक्षित सीटों को रोटेट किया जाना चाहिए। इस चक्र के अनुसार, तीन आम चुनावों के बाद देश के सभी निर्वाचन क्षेत्र कम से कम एक बार महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाते। हालांकि, 2023 में पारित मौजूदा कानून में रोटेशन का प्रविधान शामिल नहीं है। उल्लेखनीय है कि यह आरक्षण लागू होने के बाद 15 वर्षों तक प्रभावी रहेगा, जिसे संसद बाद में बढ़ा सकती है।
Source: Dainik Jagran March 10, 2026 20:12 UTC