बामुलाहिजा • थैंक्यू मिस्टर ट्रम्प, हमें फ्री ट्रेड और आर्थिक सुधारों का डर छोड़ने का मौका देने के लिए- शेखर गुप्ता एडिटर-इन-चीफ, 'द प्रिन्ट' X@ShekharGuptaमेरा एक मन यह कहना चाहता है कि 'शुक्रिया मिस्टर ट्रम्प, जो आप भारत के साथ व्यापार समझौते पर लगातार टालमटोली कर रहे हैं!' क्योंकि आप ऐसा न करते तो यहां महत्वपूर्ण आर्थिक सुधार फटाफट न किए जाते, जैसा 1991 के बाद अब तक नहीं हुआ था। उदाहरण के लिए नए श्रम नियमों को ही ले लीजिए।सरकार ने इससे पहले नया भूमि अधिग्रहण विधेयक, कृषि कानून, सबको वापस ले लिया था और जोखिम से बचने के लिए श्रम कानूनों को ठंडे बस्ते में डाल रखा था। आर्थिक प्रशासन, मसलन सरकारी बैंकों की बैलेंस शीटों की सफाई, उनकी मजबूती और दिवालिया कानून आदि के मामले में कुछ सुधार जरूर किए गए। लेकिन इस बीच 'सरकार ही माई-बाप' वाला संरक्षणवाद फिर लौट आया। टैरिफ में वृद्धि हुई और क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर के रूप में भारी-भरकम नॉन-टैरिफ सुरक्षा दीवार खड़ी कर दी गई। भारतीय उद्योग के हर सेक्टर ने इनके लिए पैरवी की और इन्हें हासिल कर लिया।तेजतर्रार भारतीय सिविल सेवाओं को मिलाकर बनी अंदरूनी मंडली ने ही इन्हें तैयार किया होगा। ट्रम्प शायद भारत की इन्हीं नॉन-टैरिफ बाधाओं का जिक्र कर रहे थे। दरअसल, इनका समय बीत चुका है। इन्हें अब हड़बड़ी से नहीं, तो मुस्तैदी से वापस किया जा रहा है। अनुभवी और भरोसेमंद अधिकारी इस वापसी परियोजना को आगे बढ़ा रहे हैं। भगवान उन्हें और शक्ति दे !
Source: Dainik Bhaskar January 14, 2026 06:27 UTC