मौसम / सर्द हवाओं से 24 घंटे में 3.6 डिग्री नीचे आया तापमान, आठ दिन में दूसरी बार लुढ़का पारा - News Summed Up

मौसम / सर्द हवाओं से 24 घंटे में 3.6 डिग्री नीचे आया तापमान, आठ दिन में दूसरी बार लुढ़का पारा


न्यूनतम तापमान 6.5 डिग्री पर पहुंचा, इस बार 1.5 डिग्री का अंतरदोपहर तक भी शहर में बना रहा धुंआ-धुंआ वातावरणमौसम विशेषज्ञ ने कहा-आगामी दिनाें में चल सकती है शीतलहर, खेतों पर धुआं कर फसलों का करें बचावDainik Bhaskar Jan 07, 2019, 05:57 PM ISTधार. उत्तर-पश्चिम से आने वाली ठंडी हवाओं के चलने से तापमान में एक बार फिर काफी गिरावट आई है। आठ दिन के अंतर में ही न्यूनतम तापमान में दूसरी बार गिरावट बड़ी है। इस बार 1.5 डिग्री का अंतर है। 30 दिसंबर को न्यूनतम तापमान 5 डिग्री दर्ज किया गया था, जबकि 7 जनवरी को पारा 6.5 डिग्री पर आकर रुका है।शहर में सोमवार को एक ही दिन में दिन व रात के तापमान में करीब 3.6 डिग्री की गिरावट आई है। एक दिन पहले तक दिन का तापमान 29.9 डिग्री व रात का 10.3 था। रात का तापमान भी कम हुआ है, वहीं सुबह से दोपहर तक कोहरा छाने से 65 किमी इंदौर जाने वाले वाहन व बसें एक की बजाय ढ़ाई घंटे में पहुंचे। कारण घना कोहरा छाने से दस फीट दूर तक के वाहन भी दिखाई नहीं दे रहे थे। तापमान में और गिरावट आने की उम्मीद मौसम वैज्ञानिक कर रहे हैं।तापमान में गिरावट के चलते सुबह से फसलों पर ओस की बूंदें ठहरी हुई दिखाई दी। लेकिन धूप निकलने के बाद ओंस गायब हो गई। मौसम के जानकारों का कहना है कि अभी दो दिन तक शीतलहर जारी रहेगी। एक-दो दिन में घना कोहरा भी लोगों को परेशान कर सकता है। मौसम विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद दुबे का कहना है उत्तर पश्चिम से आने वाली ठंडी हवाओं के चलने के कारण तापमान में काफी गिरावट आई है। इतना ही नहीं तापमान में और गिरावट आने से आगामी दिनाें में शीतलहर चल सकती है।कृषि वैज्ञानिक की किसानों को सलाह : कृषि वैज्ञानिक डॉ. जीएस गाठिये के अनुसार एक-दो दिन में तापमान और कम होगा। खासकर शीतलहर रात 1 से सुबह 5 बजे तक चलने के कारण फसलों में पाला पड़ता है। इसके लिए किसानों को रात में खेत की मेडों पर कचरा तथा खरपतवार आदि जलाकर धुआं करने की सलाह दी है। जिससे धुएं की परत फसलों के ऊपर आच्छादित हो जाए।शुष्क भूमि में पाला पड़ने का अधिक जोखिम होता है इसलिए फसलों में स्प्रिंकलर के माध्यम से हल्की सिंचाई करने की भी सलाह दी हैं। चना फसल में फली छेदक कीट के नियंत्रण के लिए समन्वित उपाय अपनाने व फूल आने की अवस्था में सिंचाई नहीं करने की सलाह दी है।


Source: Dainik Bhaskar January 07, 2019 12:11 UTC



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