मिलावट का कहर: मध्यप्रदेश में 2 महीने में दूध के 1400 में से 700 सैम्पल फेल - Dainik Bhaskar - News Summed Up

मिलावट का कहर: मध्यप्रदेश में 2 महीने में दूध के 1400 में से 700 सैम्पल फेल - Dainik Bhaskar


भिंड-मुरैना-उज्जैन जिले में 100 से ज्यादा गांवों में मिलावटी दूध-मावा तैयार हो रहाउज्जैन-चंबल के नकली दूध और मावा-पनीर की डिमांड उत्तरप्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात तकदूध टैंकर में भरकर जाता है, मावा की डलिया और पैक्ड पनीर की सप्लाई रेल-बस सेमथुरा में पेड़े के लिए दूध की और दिल्ली-नोएडा में पनीर की सबसे ज्यादा खपतदो महीने में 20 मिलावटखोरों पर रासुका, 73 पर एफआईआरDainik Bhaskar Sep 29, 2019, 07:49 AM ISTप्रमोद कुमार त्रिवेदी (भोपाल). मध्यप्रदेश के आधे जिलों में मिलावटी दूध का कारोबार चल रहा है। हर दूसरी दुकान पर दूध और दूध से बने मिलावटी पदार्थ मिल रहे हैं। खाद्य सुरक्षा और नियंत्रक के दो माह के आंकड़ों से जाहिर है कि मिलावटखोरी पूरे प्रदेश में जारी है। भिंड, मुरैना और उज्जैन में कई क्विंटल मिलावटी दूध, घी, मावा, पनीर पकड़ाया तो स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेशभर में छापे की कार्रवाई करते हुए दुकानों से सैम्पल लिए। दो महीने में 5 हजार से ज्यादा सैम्पल लिए गए। इनमें 1409 सैम्पल के लैब से आए रिजल्ट चौंकाने वाले थे। इनमें से 700 फेल हो गए।मामले फास्टट्रैक कोर्ट में ले जाने की तैयारीमध्यप्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट का कहना है कि ये आंकड़े बताते हैं कि मिलावटी सामान पिछले कई सालों से बिक रहा था। अब कार्रवाई हुई और ईमानदारी से लैब में जांच हुई तो मिलावटखोरों पर नकेल कस पा रहे हैं। देश में पहली बार मिलावटखोरों पर रासुका लगाई गई है। अब इन केसों को फास्टट्रैक कोर्ट में ले जाएंगे। कानून में बदलाव करने का भी प्रस्ताव तैयार किया है। जो मिलावटी सामान बनाएगा या बेचेगा, उसके लिए आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान कर रहे हैं।चंबल, ग्वालियर, मालवा में मिलावटी दूध का बड़े पैमाने पर कारोबारभास्कर ने मध्यप्रदेश में डेयरी उद्योग में मिलावट के कारोबार की पड़ताल की। तथ्यों से खुलासा हुआ कि चंबल, ग्वालियर, मालवा में मिलावटी दूध और उससे बने सामानों का कारोबार बड़े पैमाने पर चल रहा है। जब कार्रवाई हुई तो प्रदेश के कुछ बड़े शहरों में चल रहे इस कारोबार का भी खुलासा हुआ। मिलावटी दूध-मिठाई-घी बनाने वाले खजुराहो, खंडवा, बुरहानपुर, भोपाल, सतना, पन्ना, धार, नीमच, सिंगरौली, सिवनी, रायसेन, विदिशा, मुरैना में भी पकड़े गए। इनमें से ज्यादातर लोग रासुका लगने की जानकारी लगते ही फरार हो गए। प्रदेश में केवल मिलावटी दूध के कारोबार में ही 2.75 करोड़ रुपए रोज की भारी कमाई के कारण मिलावट का धंधा खूब फल-फूल रहा है।मुरैना में 4.5 लाख उत्पादन, लेकिन 9 लाख लीटर दूध की सप्लाईचंबल संभाग के मुरैना में दुधारू पशुओं की संख्या 2 लाख 30 हजार है। यहां इन पशुओं से दूध का उत्पादन 4.5 लाख लीटर का है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की जांच में सामने आया कि यहां से 9 लाख लीटर दूध की सप्लाई होती है। खास बात यह कि यहां 10 से ज्यादा चिलर प्लांट हैं, जो गांव वालों से तो 35 से 45 रुपए लीटर तक दूध लेते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में इसी दूध को 40 रुपए लीटर में भी बेच देते हैं। ये 5 रुपए लीटर का नुकसान नहीं उठाते, बल्कि मिलावटी दूध बनाकर 25 रुपए लीटर का फायदा उठाते हैं। मुरैना के दूध का सबसे बड़ा सौदागर आगरा में है, जो भोले के नाम का दूध प्लांट चलाता है। वह मुरैना से रोजाना 8 लाख लीटर तक मिलावटी दूध लेता है। इसके अलावा नोएडा, मेरठ और इसके आसपास के शहरों में इस मिलावटी दूध की सप्लाई होती है।भिंड में 2 लाख लीटर मिलावटी दूधमध्यप्रदेश का चंबल संभाग मिलावटी दूध की मंडी बन गया है। इस संभाग के भिंड जिले के 80 से ज्यादा गांवों में रोजाना 2 लाख लीटर मिलावटी दूध तैयार किया जाता है, जो मिश्रित दूध के नाम पर जिले से बाहर खपाने के लिए भेजा जाता है। वहीं, उज्जैन संभाग में एक लाख लीटर मिलावटी दूध बनाकर मध्यप्रदेश सहित गुजरात में सप्लाई किया जाता है। पशुपालन विभाग के अनुसार, भिंड में 1 लाख 3 हजार 489 गाय-भैंस हैं। इनसे रोजाना 3 लाख लीटर दूध का उत्पादन होता है। जिले में रोजाना की खपत करीब 6 लाख लीटर है। ऐसे में जिले में ही करीब 3 लाख लीटर मिलावटी दूध रोजाना खपाया जा रहा है। जिले के बाहर टैंकरों से दूध सप्लाई किया जाता है। इसके अलावा मावा-पनीर-घी बनाने के लिए अलग से मिलावटी दूध बनाया जाता है।डेयरी में मिलावटी दूध बन रहाक्रीम निकालने के बाद बचे दूध में पानी मिलाया जाता है। दूध को सफेद करने के लिए डिटर्जेंट मिलाया जाता है। दूध में वसा बढ़ाने के लिए रिफाइंड तेल मिलाया जाता है। मिठास के लिए ग्लूकोज पाउडर मिलाते हैं। फैट बढ़ाने के लिए नाइट्रोक्स केमिकल डाला जाता है। बाद में इसे मशीन से अच्छी तरह मिलाते हैं। इस तरह से मिलावटी दूध तैयार हो जाता है।तीन करोड़ रोज की कमाई के लालच में जहर बेच रहेग्रामीण इलाकों से डेयरी पर 35 से 40 रुपए लीटर के भाव में दूध भेजा जाता है। मिलावटी दूध बनाने का खर्च बमुश्किल 10-15 रुपए आता है। इस तरह डेयरियों से टैंकरों में भरकर दूध को बाहर भेजा जाता है तो उन्हें 1 लीटर दूध पर 25 रुपए तक मुनाफा होता है। इस तरह से 11 लाख लीटर मिलावटी दूध से रोजाना 2 करोड़ 75 लाख रुपए का मुनाफा होता है। एक किलो मावा या पनीर महज 90 रुपए में तैयार हो जाता है। बाजार में इसकी कीमत 175-200 रुपए किलो तक मिल जाती है। इस तरह इसमें दोगुना मुनाफा मिलता है। लगभग 10 हजार किलो मावा-पनीर पर 100 रुपए प्रति किलो के हिसाब से 10 लाख रुपए की कमाई करते हैं। मिलावटी घी की सप्लाई पूरे देश में करते हैं और एक किलो मिलावटी घी पर 200 रुपए कमाते हैं। इस तरह साढ़े सात हजार किलो घी पर करीबन 15 लाख की रोजाना कमाई करते हैं। दूध से 2 करोड़ 75 लाख, घी से 15 लाख और मावा-पनीर से 10 लाख यानी तीन करोड़ रुपए रोजाना की कमाई है। दुकानदार भी कमाई के लालच में इस रैकेट में शामिल हो जाते हैं। बाजार भाव से बहुत कम कीमत पर दूध और दूध से बने सामान मिलने से दूसरे प्रदेशों में भी मिलावटी दूध-मावा की डिमांड होती है और कारोबार बढ़ता जाता है।पड़ोसी राज्यों


Source: Dainik Bhaskar September 29, 2019 02:21 UTC



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