मालवा-निमाड़ के खोए जनाधार को वापस पाने की कोशिश कर रही भाजपा - News Summed Up

मालवा-निमाड़ के खोए जनाधार को वापस पाने की कोशिश कर रही भाजपा


भोपाल, धनंजय प्रताप सिंह। मध्य प्रदेश के मालवा-निमाड़ अंचल में भारतीय जनता पार्टी अपने गंवाए गढ़ को दोबारा हासिल करने के लक्ष्य के साथ चुनावी मैदान में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। विधानसभा चुनाव 2018 में भाजपा को सर्वाधिक नुकसान मालवा-निमाड़ क्षेत्र में हुआ था। यहां की 66 सीटों में से पहले लगभग 56 सीटें भाजपा के पास हुआ करती थीं, जो आधे से भी कम पर सिमट गईं। खासतौर से मजबूत जनाधार वाले आदिवासी बेल्ट धार, खरगोन, झाबुआ में भी भाजपा को भारी शिकस्त मिली थी। अब लोकसभा चुनाव में भाजपा पूरी कोशिश कर रही है कि इन आदिवासी क्षेत्रों सहित मालवा-निमाड़ अंचल में भाजपा का जनाधार वापस लाया जा सके।2016 से खिसकने लगा था जनाधार2014 के चुनाव में भाजपा ने आदिवासी सीट झााबुआ पर जीत हासिल की थी, लेकिन सांसद दिलीप सिंह भूरिया की मृत्यु के बाद हुए उपचुनाव में भाजपा हार गई। इस उपचुनाव के साथ ही भाजपा का मालवा-निमाड़ में जनाधार खिसकने की शुरूआत हुई थी। इसके बाद भाजपा को नगरीय परिषदों के चुनाव में भी भारी पराजय का सामना करना पड़ा था। अंचल के कद्दावर नेताओं के क्षेत्र में भाजपा नगरपालिका और परिषद के चुनाव हार गई थी। स्थानीय नेताओं के प्रति एंटीइनकमबेंसी के बाद भी जब भाजपा ने विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं बदले तो मालवा-निमाड़ की अधिकांश सीटों पर पार्टी को हार मिली। यहीं से कांग्रेस सरकार बनने का रास्ता साफ हुआ।भाजपा को 30 सीटों का नुकसान हुआमप्र में विधानसभा की कुल 230 सीटें हैं। इनमें से 66 सीटें सिर्फ मालवा इलाके में पड़ती हैं। 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने यहां 56 सीटें जीती थीं। कांग्रेस के हिस्से में नौ सीटें गईं और एक सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी की जीत हुई पर 2018 के विधानसभा चुनाव में बाजी पलट गई। भाजपा को मात्र 26 सीट मिली और कांग्रेस को 40। मालवा के इलाके में हार के कारण ही सूबे में भाजपा सरकार नहीं बना पाई। 2014 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा को आठों लोकसभा क्षेत्रों में जीत मिली थी।पुराने नतीजे दोहराना चाह रही भाजपाअधिकांश सीटों पर चेहरे बदलने के बाद भाजपा की पूरी कोशिश है कि मालवा-निमाड़ में 2014 के नतीजे फिर दोहराए जाएं। यही कारण है कि इस इलाके में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के सर्वाधिक दौरे हुए हैं। 17 को प्रधानमंत्री फिर खरगोन आने वाले हैं। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह रोजाना यहां कई सभाएं कर रहे हैं।इंदौर में रोचक मोड़भाजपा के मजबूत किले इंदौर में प्रियंका गांधी के रोड शो के बाद से मुकाबला रोचक हो गया है। भाजपा ने पहली बार 1989 में इंदौर सीट जीती थी, इसके बाद से जीत का यह सिलसिला लगातार जारी है। इंदौर से लगातार आठ बार सांसद रही सुमित्रा महाजन का टिकट काटकर भाजपा ने शंकर लालवानी को प्रत्याशी बनाया है। कांग्रेस ने इस सीट पर पंकज संघवी को उतारा है। विधानसभा चुनाव के बाद इंदौर के राजनीतिक समीकरण भी बदल गए हैं। यहां की आठ में से कांग्रेस और भाजपा दोनों के पास चार-चार सीटें हैं।देवास में दोनों नए चेहरेअनुसूचित जाति के लिए आरक्षित देवास सीट पर भाजपा और कांग्रेस दोनों ने नए चेहरे उतारे हैं। कांग्रेस ने पद्मश्री और कबीरपंथी भजन गायक प्रहलाद सिंह टिपानिया पर दांव लगाया है तो भाजपा ने पूर्व जज महेंद्र सिंह सोलंकी को मैदान में उतारा है। दोनों ही पार्टियों के प्रत्याशी अपनी राजनीतिक पारी का आगाज लोकसभा चुनाव से कर रहे हैं। 2008 में बनी इस संसदीय सीट पर 2009 के चुनाव में कांग्रेस के सज्जन सिंह वर्मा ने जीत हासिल की थी। उन्होंने थावरचंद गहलोत को हराया था। 2014 में मोदी लहर में भाजपा के मनोहर ऊंटवाल ने यह सीट छीन ली थी। देवास सीट के तहत आठ विधानसभा सीटें आती हैं, जिनमें से चार कांग्रेस और चार भाजपा के पास है।उज्जैन में सीधा मुकाबलाउज्जैन में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है। भाजपा ने सांसद चिंतामणि मालवीय की जगह इस बार अनिल फिरोजिया को मैदान में उतारा है। कांग्रेस ने बाबूलाल मालवीय को मैदान में उतारकर लड़ाई को दिलचस्प बना दिया है। यहां की आठ विधानसभा सीटों में से पांच पर कांग्रेस का कब्जा है और तीन पर भाजपा का।मंदसौर में फिर मीनाक्षी की परीक्षामंदसौर लोकसभा सीट से भाजपा ने मौजूदा सांसद सुधीर गुप्ता को फिर से मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस ने एक बार फिर मीनाक्षी नटराजन पर ही भरोसा जताया है। 2014 में इन्हीं दोनों नेताओं के बीच सियासी जंग हुई थी और सुधीर गुप्ता ने नटराजन को करीब तीन लाख मतों से मात दी थी। विधानसभा चुनाव के लिहाज से देखें तो मंदसौर संसदीय सीट के तहत आठ विधानसभा सीटें आती हैं, इनमें से सात भाजपा और एक कांग्रेस के पास है।खरगोन को बचाने में जुटी भाजपाइस लोकसभा सीट पर भाजपा ने सुभाष पटेल का टिकट काटकर गजेंद्र सिंह पटेल पर भरोसा जताया है। जबकि कांग्रेस ने डॉ. गोविंद मुजाल्दा को मैदान में उतारा है। 2014 में भाजपा के सुभाष पटेल ने करीब ढाई लाख मतों से जीत हासिल की थी। पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस इस इलाके में बड़ी सेंध लगाने में कामयाब रही है। यहां की आठ विधानसभा सीट में से छह सीटें कांग्रेस ने जीती थी। जबकि महज एक सीट भाजपा और एक सीट पर निर्दलीय ने कब्जा जमाया था।खंडवा में दो पूर्व प्रदेशाध्यक्षों की प्रतिष्ठा दांव परखंडवा लोकसभा सीट पर भाजपा ने नंदकुमार सिंह चौहान पर एक बार फिर भरोसा जताया है, जबकि कांग्रेस ने पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव को उतारा है। 2014 में मोदी लहर में चौहान ने अरुण यादव को तीन लाख से ज्यादा मतों से हराया था। हालांकि 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा ने चार-चार सीटों पर जीत दर्ज की है। ऐसे में कांग्रेस और भाजपा के बीच कांटे का मुकाबला है।रतलाम में कांटे का मुकाबलाकांग्रेस का मजबूत गढ़ रतलाम-झाबुआ में आदिवासी चेहरा कांतिलाल भूरिया एक बार फिर मैदान में हैं, जबकि भाजपा ने जीएस डोमार को प्रत्याशी बनाया है


Source: Dainik Jagran May 15, 2019 15:00 UTC



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