बिहार / नियोजित शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट से झटका, नहीं मिलेगा समान काम के बदले समान वेतन - News Summed Up

बिहार / नियोजित शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट से झटका, नहीं मिलेगा समान काम के बदले समान वेतन


Dainik Bhaskar May 10, 2019, 05:35 PM IST3.57 लाख नियोजित शिक्षकों के मामले में 3 सितंबर को सुरक्षित रखे निर्णय को सुनायाकेंद्र और राज्य सरकार ने समान काम के बदले समान वेतन लागू करने से मना कर दिया थापटना. राज्य के 3.57 लाख नियोजित शिक्षकों को समान काम के बदले समान वेतन नहीं मिलेगा। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश अभय मनोहर सप्रे व उमेश ललित की खंडपीठ ने शुक्रवार को फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि नियोजित शिक्षक नियमित शिक्षक नहीं हैं। इसलिए ये नियमित शिक्षकों की तरह वेतन पाने के हकदार नहीं हैं। इनकी नियुक्ति अलग नियमावली के तहत हुई है।राज्य सरकार की ओर से दायर एसएलपी स्वीकार होने से नियोजित शिक्षक निराश हैं। 3 अक्टूबर 2018 को को इस खंडपीठ ने केंद्र व राज्य सरकार के साथ शिक्षक संघों का पक्ष सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।राज्य सरकार के वकील मनीष कुमार के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में स्पष्ट कर दिया है कि नियोजित शिक्षक नियमित शिक्षक नहीं हैं। समय-समय पर राज्य सरकार अपने संसाधनों से इन शिक्षकों के वेतन में वृद्धि करती रही है। 1500 प्रतिमाह से वेतन 25 से 30 हजार रुपए हो गए हैं। आगे भी सरकार वेतन में वृद्धि करती रहेगी। सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार की ओर गठित उच्च स्तरीय कमेटी ने 20 प्रतिशत तक वेतन वृद्धि का प्रस्ताव दिया था।31 अक्टूबर 2017 में पटना हाईकोर्ट ने नियोजित शिक्षकों के पक्ष में फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने 14 दिसंबर 2017 को सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। सुप्रीम कोर्ट में 24 दिनों तक बहस चली। केंद्र और राज्य सरकार ने समान काम समान वेतन देने पर हाथ खड़े कर लिए थे।सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि जुलाई 2015 से ही शिक्षकों को वेतनमान दिया जा चुका है। 2015 में 14 और 2017 में लगभग 17 प्रतिशत शिक्षकों के वेतन में बढ़ोतरी भी हुई है। केंद्र सरकार की ओर से अटार्नी जनरल वी वेणुगोपाल ने तर्क दिया था कि 1.36 लाख करोड़ का अतिरिक्त भार केंद्र सरकार को वहन करना संभव नहीं है। राज्य सरकार के वकील ने भी कहा था कि आर्थिक स्थिति नहीं कि 3.57 लाख नियोजित शिक्षकों को पुराने शिक्षकों के बराबर समान वेतन दे सके। समान काम समान वेतन देने पर सरकार को सालाना 28 हजार करोड़ का बोझ पड़ेगा। एरियर देने की स्थिति में 52 हजार करोड़ भार पड़ेगा।45 से 70 हजार रुपए तक हो जाता वेतनपंचायती राज, नगर निकाय सहित विभिन्न नियोजन इकाईयों से नियोजित शिक्षकों को राज्य सरकार वेतनमान दे रहीं है। इन्हें सातवां वेतन आयोग की अनुशंसा के आधार पर भी लाभ दिया जा रहा है। अभी इन शिक्षकों को लगभग 25 से 30 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन मिल रहा है। शिक्षकों के पक्ष में फैसला आने की स्थिति में इन शिक्षकों का वेतन सीधे 45 से 70 हजार रुपए प्रतिमाह हो जाता।31 अक्टूबर 2017 में हाईकोर्ट ने शिक्षकों के पक्ष में दिया था फैसला2009 में बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ ने समान काम समान वेतन मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ, परिवर्तनकारी शिक्षक संघ सहित विभिन्न शिक्षक संघों ने हाईकोर्ट में इस मामले में अलग-अलग तारीखों में अपील की थी। 31 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने नियोजित शिक्षकों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए समान काम के बदले समान वेतन देने का आदेश दिया था। 2010 से ही नियोजित शिक्षकों को वेतन एरियर के साथ देने का आदेश दिया था।शिक्षक संघ इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू अर्जी दायर कर सकतेसुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद शिक्षक संघ रिव्यू अर्जी दायर कर सकते हैं। रिव्यू अर्जी स्वीकार होने की स्थिति में फिर इस मामले में सुनवाई हो सकती है। शिक्षकों संघों ने कहा रिव्यू में जाएंगे - बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रवक्ता अभिषेक कुमार ने कहा कि अब रिव्यू के लिए अर्जी दाखिल करेंगे। बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ के शिशिर कुमार पांडेय व नवनीत कुमार मिश्र, परिवर्तनकारी शिक्षक संघ आनंद मिश्र व जयकांत धीरज, राज्यस्तरीय स्नातकोत्तर प्लस टू शिक्षक संगठन के डॉ. कृतन्जय ने कहा कि हम पूरी तरह आशांन्वित थे कि हमारे पक्ष में फैसला आएगा। मैराथन सुनवाई में भी न्यायाधीश ने सरकार से वेतन बढ़ाने के लिए कह रहे थे। इस फैसले के अध्ययन के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी। हम फैसले से पूरी तरह निराश नहीं हैं।


Source: Dainik Bhaskar May 10, 2019 05:37 UTC



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