2011 में तृणमूल कांग्रेस पहली बार पश्चिम बंगाल की सत्ता में आई। तब बिमान बनर्जी विधानसभा अध्यक्ष चुने गए। इसके बाद से वह लगातार बरुईपुर पश्चिम विधानसभा से जीतकर विधानसभा पहुंचे और सदन के अध्यक्ष रहे। स्पीकर के तौर पर उनका अनुभव 15 साल का है। बतौर विधानसभा अध्यक्ष उन्होंने गवर्नर के साथ ममता सरकार के विवाद के दौरान काफी चर्चित रहे।कलकत्ता यूनिवर्सिटी से एमकॉम और एलएलबी करने के बाद बिमान बनर्जी ने कई प्रफेशन में हाथ आजमाया। उनके दादा सतीश चंद्र बनर्जी, और पिता प्रणोतोष बनर्जी कोलकाता के जाने-माने वकील थे। बिमान बनर्जी ने पढ़ाई के बाद बैंक ऑफ इंडिया में नौकरी की, फिर वकालत करने लगे। एक कॉलेज में लेक्चरर भी रहे। 1985 में उन्होंने वकालत के साथ नगर निगम चुनाव के जरिये राजनीति में कदम रखा।वह वॉर्ड नंबर 136 से कलकत्ता नगर निगम के पार्षद चुने गए। उन्हें पश्चिम बंगाल बार काउंसिल के मेंबर भी रहे। इस दौरान वह ममता बनर्जी के खास नेताओं में शुमार हुए। जब ममता बनर्जी ने टीएमसी का गठन किया, तब वह पार्टी में शामिल होने वाले शुरुआती नेता रहे। 2011 में कोलकाता पोर्ट के वोटर बिमान बनर्जी साउथ 24 परगना जिले के बरुईपुर पश्चिम विधानसभा से चुने गए। इसके बाद हर चुनाव में वह विरोधी पर भारी रहे। इस बार भी वह बरुईपुर से चुनाव लड़ रह रहे हैं।
Source: Navbharat Times March 18, 2026 12:00 UTC