नई दिल्ली [जागरण स्पेशल़] क्या कोई कभी ये भी सोच सकता है कि कोई बालू के टीले पर किला बना सकता है। एकबारगी तो बालू का इस्तेमाल करते हुए कोई किला बनाने के लिए सोच भी नहीं सकता है मगर विश्व रिकार्ड बनाने के लिए लोग कुछ भी करने को तैयार हो जाते हैं। जर्मनी में बनाए गए एक बालू के किले को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में सबसे ऊंचे रेत के महल का खिताब मिला है।नया विश्व रिकॉर्ड अपने नाम करने वाला यह बालू का किला जर्मनी के रुएगेन द्वीप पर स्थित बिंत्स में बनाया गया। बाल्टिक सागर में स्थित इस रिजॉर्ट टाउन में कलाकारों ने 17.66 मीटर (यानि 57.94 फीट) ऊंचा किला बनाने में कामयाबी पाई है। दो साल पहले उनका ऐसा ही एक प्रयास असफल हो गया था, उसके बाद वो लगातार प्रयास करते रहे और आखिर में वो किला बनाकर माने। कई अंतरराष्ट्रीय लोगों की टीम ने पिछले रिकॉर्ड से भी करीब एक मीटर और ऊंचा बालू का किला बनाया, बालू का ऐसा किला बनाने का पिछला रिकॉर्ड 16.68 मीटर का था।कलाकारों की इस टीम ने मई महीने में इसे बनाने का काम शुरु किया था। इसके लिए उन्होंने खुदाई करने वाले औजारों और बालु को उठाने के लिए क्रेन का इस्तेमाल किया। इस पूरे ढांचे को बनाने में 11 टन से भी अधिक बालू की खपत हुई। किला बनाने के लिए सबसे पहले कोन के आकार का एक बड़ा ढांचा बनाया गया, जिसकी ऊंचाई 27 मीटर थी। फिर इस पर नक्काशी करके कलाकारों ने इसे किले की शक्ल देने का काम शुरु किया। कई महीनों की मशक्कत के बाद इसे पूरा किया जा सका।जब ये काम पूरा हो गया उसके बाद देखने वालों की आंखें इसे निहारती रही। विजयी रहे समूह में नीदरलैंड्स, रूस, हंगरी, लात्विया और पोलैंड के कलाकार शामिल थे। इस आयोजन के कर्ताधर्ता थोमास फान डेन डुंगेन की भी किस्मत चमक गई। उन्होंने दो साल पहले जब इसी रिकॉर्ड को तोड़ने की कोशिश की थी तो किले को अंतिम रूप देते समय वह ढह गया था। किला ढह जाने के बाद उन्हें काफी दुख हुआ था। टीम के अन्य सदस्य भी काफी दुखी हुए थे।अब इस नए किले को पहले से भी बड़ा बनाया गया है। इस साल 3 नवंबर तक पर्यटक खुद जाकर भी इस बालू के किले को देख सकते हैं। किला वहां चल रही शिल्प प्रदर्शनी का हिस्सा है। इससे पहले गिनीज बुक में जिस बालू के किले ने नाम रिकॉर्ड था, वह भी जर्मनी में ही बनाया गया था। पुराना रिकॉर्ड 2017 में जर्मन शहर डुइसबुर्ग में बनाया गया था।लोकसभा चुनाव और क्रिकेट से संबंधित अपडेट पाने के लिए डाउनलोड करें जागरण एपPosted By: Vinay Tiwari
Source: Dainik Jagran June 10, 2019 11:37 UTC