नई दिल्ली, जेएनएन। युवराज सिंह को एक बेहतरीन क्रिकेटर के तौर पर तो याद रखा ही जाएगा पर इसके अलावा वो पूरी दुनिया के लिए मिसाल बने। युवी ने दिखाया कि जज्बा हो तो मैदान पर भी जीत संभव है और जिंदगी में भी कोई भी काम मुश्किल नहीं है। जब विश्व कप 2011 भारतीय धरती पर खेला जा रहा था उस वक्त युवी कैंसर जैसी घातक बिमारी से जूझ रहे थे। इसके बावजूद इस खिलाड़ी ने अपने देश के लिए खेलना जारी रखा और ना सिर्फ टीम को विश्व विजेता बनाया बल्कि मैन ऑफ द टूर्नामेंट का खिताब भी अपने नाम किया। इसके बाद उन्होंने कैंसर के खिलाफ भी जंग लड़ी और उसमें भी जीत हासिल की।2011 विश्व कप में वेस्टइंडीज के खिलाफ लीग मैच के दौरान युवी को खून की उल्टियां हो रही थी। इसके बावजूद वो मैदान पर डटे रहे और 113 रन की शतकीय पारी खेल डाली। जब युवराज क्रीज पर आए थे उस वक्त टीम इंडिया ने 51 रन पर अपने दो विकेट गंवा दिए थे। युवी ने इस मैच में तीन विकेट भी लिए और शतक भी लगाया और मैन ऑफ द मैच बने। युवराज सिंह की महानता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भयंकर तकलीफ में होते हुए भी उन्होंने अपने देश के लिए मैच खेला और ना सिर्फ जीत दिलाई बल्कि मैच के बेस्ट प्लेयर भी बने। युवी इस टूर्नामेंट में मैच ऑफ द सीरीज भी बने और उन्होंने 362 रन के साथ-साथ 15 विकेट भी चटकाए थे। युवी इस विश्व कप में दुनिया के पहले ऑलराउंडर बने जिन्होंने विश्व कप टूर्नामेंट में 300 से ज्यादा रन बनाए और 15 विकेट भी लिए।युवराज सिंह को खेल के दूसरे सर्वोच्य सम्मान अर्जुन अवॉर्ड से वर्ष 2012 में नवाजा गया था। वर्ष 2014 में उन्हें पद्म श्री सम्मान से सम्मानित किया गया।लोकसभा चुनाव और क्रिकेट से संबंधित अपडेट पाने के लिए डाउनलोड करें जागरण एपPosted By: Sanjay Savern
Source: Dainik Jagran June 10, 2019 11:27 UTC