सिद्धार्थनगर :तहसील अन्तर्गत भारतभारी स्थित मंदिर पर भरत महोत्सव के अवसर आयोजित रामकथा में पंडित चंद्रशेखर रामायणी ने अवध नगरी के महत्व पर बृहद रूप से प्रकाश डाला, कहा कि यह नगरी बहुत ही पावनी है, जहां भगवान ने श्रीराम के रूप में अवतार लिया।कथावाचक ने अवध की महिमा का वर्णन करते कहा कि चारि खानि जगजीव प्रकारा, अवध तजे नहि तनु संसारा चार प्रकार के जीव होते हैं। अंडज, स्वेदज, उछ्विद, जरायुज, ये सभी अवध में शरीर का त्याग करते हैं, तो मुक्त हो जाते हैं। सरयू के तट पर बसी यह नगरी अति पावनी है, क्योंकि यहीं पर भगवान ने राम रूप में अवतार लेकर अवध को धन्य किया। अन्य धामों से अगर इसकी तुलना की जाए तो यह सबसे श्रेष्ठ मानी जाती है। जैसे कोटि कल्प काशी वसे, मथुरा कल्प हजार, एक निमिष सरयू वशे, तो तुलहि न तुलसी दास । राम जन्म के प्रसंग का भी वर्णन विस्तार पूर्वक किया। कथावाचक ने कहा, कि तुलसी दास कहते हैं कि भगवान के जन्म की कथा में उनके रोने की कथा को जो श्रवण करता है, वो भवसागर से पार हो जाता है, तथा हरि के पद को प्राप्त करता है।आयोजक महंत कृष्ण मणि दास ने सभी के प्रति आभार ज्ञापित किया। आचार्य पं. रामबृक्ष पाण्डेय, विनोद पांडेय, दुर्गा प्रसाद पाठक, रमन पाण्डेय, नर्वदेश्वर, राम अवध, गोविन्द, शिवपूजन, बुद्धन सहित बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित रहे।Posted By: Jagran
Source: Dainik Jagran April 19, 2019 16:52 UTC