फिर बहेगी पाक शायर जॉन एलिया की अजीज अमरोहा की बान नदी - News Summed Up

फिर बहेगी पाक शायर जॉन एलिया की अजीज अमरोहा की बान नदी


अनिल अवस्थी, अमरोहा : वर्ष 1957 में अमरोहा छोड़कर पाकिस्तान जा बसे प्रख्यात शायर जॉन एलिया की रगों में भी बान नदी की दीवानगी समाई थी। वह जब भी अमरोहा आते थे तो बान नदी के पानी को माथे पर लगाते थे। कराची में समुद्र की लहरें भी उनके मन में बसे बान नदी के प्रेम को डिगा नहीं सकी थीं। समुद्र तट पर बैठकर लिखी गई उनकी शायरी- 'इस समंदर पे तिशनकाम र्हं मैं, बान तुम अब भी बह रही हो क्या?Ó यह नदी उनकी दीवानगी को बयां करती है। अमरोहा की बान भी अब विलुप्तप्राय नदियों की श्रेणी में शामिल है मगर दैनिक जागरण के सोत-बान संरक्षण अभियान के बाद इसके दोबारा बहने की उम्मीद जग गई है। जिलाधिकारी ने इसी सप्ताह से इसकी खोदाई शुरू कराने का एलान किया है।1999 में अंतिम बार अमरोहा आए थे शायर मशहूर शायर जॉन एलियामुहल्ला लकड़ा निवासी मुहम्मद आदिल बताते हैं करांची में बसने के बाद भी जॉन एलिया प्रतिवर्ष अमरोहा आते थे। वर्ष 1999 में वह अंतिम बार अमरोहा आए थे। हर बार वह बान नदी के किनारे जाते थे और बान के पानी को माथे से लगाते थे। इस दौरान आदिल भी उनके साथ होते थे। जॉन एलिया ने ही बताया था कि करांची के समुद्र तटों पर भी उन्हें बान की याद सताती है। बान की याद में लिखी उनकी शायरी का मतलब था कि समुंदर के किनारे भी वह प्यासे हैं, प्यास बुझाने को बान क्या तुम अब भी बहती हो। अमरोहा की वही बान आज सोत नदी की तरह अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है।पहले थी तीन गुना चौड़ी, अब अस्तित्व समाप्ततहसील के दस्तावेजों में यह नदी सोत नदी से लगभग तीन गुना तक चौड़ी है मगर आज जिले में ही कई स्थानों पर इसका अस्तित्व समाप्त हो चुका है। बान अमरोहा के लगभग 42 किमी के दायरे को पारकर सम्भल जिले में प्रवेश करती है। अमरोहा के अधिकांश हिस्से में सूखी पड़ी इस नदी की जमीन पर लोग खेती कर रहे हैं। वहीं कुछ लोगों ने तो मकान और दुकानें तक बना ली हैं। दैनिक जागरण के अभियान के बाद जिला प्रशासन भी इस नदी को पुनर्जीवित करने के लिए मुखर हो गया है। जिलाधिकारी उमेश मिश्र ने बताया कि नदी की जमीन की पैमाइश शुरू हो गई है, इसी सप्ताह इसकी खोदाई शुरू करा दी जाएगी।कोटद्वार के नजदीक से निकलती है बानबान नदी कोटद्वार के नजदीक बिजनौर की नजीबाबाद तहसील की ग्राम पंचायत अलावलपुर नैनू स्थित एक झील से निकलती है। वहां से यह अमरोहा की तहसील नौगावां सादात व अमरोहा, जोया होते हुए मुरादाबाद जिले में प्रवेश करती है। डीसी मनरेगा एके उपाध्याय ने बताया कि आगे जाकर बान नदी मुरादाबाद स्थित गांगन में मिल जाती है।लोकसभा चुनाव और क्रिकेट से संबंधित अपडेट पाने के लिए डाउनलोड करें जागरण एपPosted By: Narendra Kumar


Source: Dainik Jagran May 07, 2019 08:37 UTC



Loading...
Loading...
  

Loading...

                           
/* -------------------------- overlay advertisemnt -------------------------- */