2017 में मौर्य के हाथ सीएम की कुर्सी आते-आते रह गई थी। पार्टी ने अति पिछड़ी जाति से आने वाले अपने इस नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर चुनाव लड़ा था, लेकिन सरकार बनी तो उन्हें डिप्टी सीएम पद से ही संतोष करना पड़ा। इस बात की टीस खत्म नहीं हुई है। असम के मामले से राजस्थान बीजेपी के भी कई नेता फिक्रमंद हैं। उन्हें लग रहा था कि वसुंधरा राजे को किनारे लगाने में कामयाब होने पर सीएम पद के लिए उनकी दावेदारी मजबूत होगी।अब ‘ना’ ही समझिए! कोविड की दूसरी लहर में बढ़े खतरे के बाद अगर किसी की कोई चर्चा है तो वह हैं नितिन गडकरी। सोशल मीडिया के जरिए इस मांग ने जोर पकड़ लिया है कि मौजूदा हालात से निपटने के लिए गडकरी योग्य नेता हैं। इसलिए हर्षवर्धन को हटाकर गडकरी को ही स्वास्थ्य मंत्री बनाया जाए। इस मांग के समर्थन में बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी भी हैं। उन्होंने ट्वीट किया, ‘भारत कोरोना वायरस महामारी से भी उसी तरह उबर जाएगा, जैसे वह मुस्लिम आक्रमणकारियों और ब्रिटिश उपनिवेशवादियों से उबरा था। अभी कड़े एहतियात नहीं बरते गए, तो हो सकता है कि हम कोरोना की एक और लहर का सामना करें, जिससे बच्चे भी प्रभावित होंगे। इसलिए मोदी को चाहिए कि वह इस जंग की अगुआई गडकरी के हाथों में दे दें। प्रधानमंत्री कार्यालय के भरोसे रहना बेकार है।’ उनके इस ट्वीट पर किसी ने सवाल किया कि गडकरी ही क्यों? इस पर स्वामी ने कहा, ‘क्योंकि कोविड-19 का सामना करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार की जरूरत है। गडकरी इस क्षेत्र में अपनी काबिलियत साबित कर चुके हैं।’ उधर, महाराष्ट्र के इस दिग्गज नेता को समझ नहीं आ रहा है कि यह सारा अभियान उनके पक्ष में है या उनके खिलाफ जा रहा है? मीडिया के कुछ लोगों ने तो गडकरी के ऑफिस फोन लगा दिया। उन लोगों ने पूछा कि गडकरी को स्वास्थ्य मंत्री बनाए जाने को लेकर जो अटकलें लग रही हैं, उनमें कितना दम है? इस पर एक अधिकारी ने चुटकी लेते हुए जवाब दिया, ‘स्वामी जी के समर्थन में आने के बाद तो जो दम रहा होगा, वह भी निकल गया होगा। इसकी संभावना ‘ना’ के बराबर ही समझिए।’ वैसे राजनीतिक गलियारों में यह तय माना जा रहा है कि स्थितियां काबू में आते ही स्वास्थ्य मंत्रालय में फेरबदल जरूर होगा, लेकिन स्वास्थ्य मंत्री कौन होगा, इसका जवाब उसी वक्त मिलेगा।
Source: Navbharat Times May 11, 2021 03:32 UTC