कहने के लिए तो फेमिनिज्म का अर्थ होता है कि महिलाओं के लिए आजादी या समानता की बात करना, परन्तु कैसी आजादी? जिस पति को जानवर यह फेमिनिस्ट बताती हैं, उस पति से अलग होकर हिन्दू महिलाएं कैसे सूखे पत्ते की तरह गिरती हैं, कहीं और! यह कारण न ही समझ आता है और न ही इसके कारण बहुत अधिक स्पष्ट हो पाते हैं, सिवाय इसके कि वह जाल में फंस जाती हैं? और वह कभी कभी मुस्लिम प्रेमी के इश्क में इतनी अंधी हो जाती हैं कि वह अपने पति का खून तक कर देती हैं? आशादेवी की हत्या एवं मध्यप्रदेश में जिशान के इश्क में फंसकर अपने पति की हत्या करने वाली युवती दोनों ही मामले इस समस्या पर गहन मंथन की मांग करते हैं कि अंतत: हिन्दू महिलाएं जो अपने पति की बात नहीं सुनती हैं, अपने पति को शोषक मानती हैं, वह इनकी हवस का शिकार कैसे हो जाती हैं?
Source: Dainik Bhaskar September 21, 2022 17:44 UTC