दलहन उत्पादन को बनाए रखना बड़ी चुनौती, ये है मुख्य वजहें - News Summed Up

दलहन उत्पादन को बनाए रखना बड़ी चुनौती, ये है मुख्य वजहें


सुरेंद्र प्रसाद सिंह, नई दिल्ली। रबी सीजन वाली फसलों की बोआई अगले सप्ताह से शुरू होने वाली है, जिसकी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। सरकार का जोर इस बार तिलहन फसलों की खेती पर है। लेकिन इसके साथ दलहन और मोटे अनाज वाली फसलों का रकबा घटने का खतरा भी है। इन फसलों की खेती में समन्वय बनाने की जरूरत पर सरकार का जोर होगा। खाद्य तेलों की आयात निर्भरता घटाने के साथ दलहन और मोटे अनाज का उत्पादन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी। इसके लिए जहां मिश्रित खेती की रणनीति तैयार की गई है, वहीं करोड़ों हेक्टेयर परती छोड़ी जाने वाली जमीन के उपयोग पर सरकार प्रमुखता से ध्यान देने वाली है।खाद्य तेलों की कुल जरूरतों का 60 फीसद से अधिक आयात करना पड़ता है, जिस पर 80 हजार करोड़ रुपये से अधिक विदेशी मुद्रा खर्च होती है। सरकार ने इसे हर हाल में घटाने की योजना तैयार की है, जिसके तहत तिलहन फसलों की खेती को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए रबी सीजन से ही ऑयल सीड उप-मिशन शुरू हो रहा है। किसानों को उन्नत प्रजाति के बीजों के किट मुफ्त वितरित किए जा रहे हैं। तिलहन बीज हब बनेगा, जिसमें उन्नत बीज तैयार किए जाएंगे।केंद्रीय कृषि आयुक्त डॉ. सुरेश मल्होत्र ने बताया कि तिलहन के साथ दलहन और मोटे अनाज की पैदावार बनाए रखने की चुनौती से निपटने की रणनीति तैयार की गई है। देश की कुल खेती योग्य भूमि का एक बड़ा हिस्सा एक-फसली होता है। बाकी समय उसे परती छोड़ दिया जाता है। खेती वाली इस जमीन का उपयोग तिलहनी फसलों की खेती में किया जा सकता है। डॉ. मल्होत्र का कहना है कि देश में सामान्य तौर पर खरीफ सीजन में कुल 10.63 करोड़ हेक्टेयर में खेती की जाती है। जबकि रबी सीजन में यह घटकर 7.20 करोड़ हेक्टेयर रह जाती है। तीन करोड़ हेक्टेयर से अधिक खेती पूरी तरह असिंचित है, जिस पर खरीफ सीजन की खेती तो होती है, लेकिन रबी सीजन में जमीन का इतना बड़ा हिस्सा परती छोड़ दिया जाता है।इसमें सिंचाई साधन बढ़ाकर इसमें जरूरत वाली फसलों की खेती की जा सकती है। सरकार की योजना इस परती छोड़ी जाने वाली जमीन को विकसित करने की है। ऐसी जमीनें राजस्थान, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे सूखाग्रस्त क्षेत्रों में छोड़ी जाती है। कृषि मंत्रलय के ताजा आंकड़ों के हिसाब से चालू खरीफ सीजन में 1.20 करोड़ हेक्टेयर में दलहनी, 1.88 करोड़ हेक्टेयर में मोटे अनाज वाली और 1.82 करोड़ हेक्टेयर में तिलहनी फसलों की खेती की गई है। मानसून की बारिश से इस सीजन में इन फसलों की खेती अच्छी तो हो जाती है, लेकिन रबी में यह आंकड़ा घट जाता है।Posted By: Niteshअब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप


Source: Dainik Jagran September 29, 2019 04:41 UTC



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