जिन देशों में निकोटीन के सुरक्षित विकल्प उपलब्ध हैं, वहाँ सिगरेट सेवन कम हुआ और जन स्वास्थ्य में सुधार हुआ– थोलोस फाउंडेशन का अध्ययन - News Summed Up

जिन देशों में निकोटीन के सुरक्षित विकल्प उपलब्ध हैं, वहाँ सिगरेट सेवन कम हुआ और जन स्वास्थ्य में सुधार हुआ– थोलोस फाउंडेशन का अध्ययन


जापान और स्वीडन में सिगरेट सेवन घटकर क्रमशः 30 प्रतिशत से कम और 5.6 प्रतिशत तक पहुँचा; जबकि भारत में स्वतंत्र वैज्ञानिक आकलन की कमी है और ग्राहकों को कम नुकसान वाले विकल्प उपलब्ध नहीं हैंIndia, 2026: थोलोस फाउंडेशन के एक अंतर्राष्ट्रीय व्हाइट पेपर के मुताबिक, जिन देशों में वैज्ञानिक प्रमाण के आधार पर निकोटीन के सुरक्षित विकल्पों को मंजूरी दी गई है, वहाँ सिगरेट के सेवन और उससे जुड़ी बीमारियों में तेज़ और स्थिर कमी दर्ज हुई है।सेफर निकोटीन वर्क्स नाम की इस रिपोर्ट के अनुसार, जब तम्बाकू नियंत्रण की मौजूदा नीतियों के साथ सिगरेट का सेवन करने वालों को रैगुलेटेड और कम नुकसान वाले निकोटीन उत्पाद उपलब्ध होते हैं, तो सिगरेट के सेवन में तेजी से कमी आती है तथा जन स्वास्थ्य में सुधार होता है।इस रिपोर्ट में बताया गया है कि जापान और स्वीडन में सिगरेट के सेवन में तेज़ कमी दर्ज हुई क्योंकि ग्राहकों ने हीटेड टोबैको और ओरल निकोटीन प्रोडक्ट्स जैसे सुरक्षित विकल्पों का सेवन शुरू कर दिया। जापान में पुरुषों के बीच सिगरेट का सेवन साल 2020 में गिरकर 30 प्रतिशत से नीचे चला गया। साल 2016 में टोबैको हीटिंग सिस्टम पेश होने के बाद ऐसा पहली बार हुआ था। इससे पहले कई सालों तक सिगरेट का सेवन स्थिर बना हुआ था। इस गिरावट ने पाँच सालों में सिगरेट के सेवन में 32 प्रतिशत कमी लाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।दूसरी तरफ, स्वीडन में सिगरेट का सेवन साल 2023 में गिरकर 5.6 प्रतिशत तक पहुँच गया, जिससे यह देश सिगरेट सेवन मुक्त बनने के करीब पहुँच गया। देश में सिगरेट सेवन में हुई इस गिरावट में साल 2016 में बाजार में शुरू किए गए स्नस और निकोटीन पाउच का बड़ा योगदान था।सिगरेट सेवन में यह गिरावट लाने के लिए सिगरेट पर रोक लगाने की जरूरत नहीं पड़ी। बल्कि इसके लिए व्यस्कों को कम नुकसान वाले रैगुलेटेड और विज्ञान पर आधारित विकल्प उपलब्ध कराए गए।भारत में कम नुकसान वाले विकल्पों के जन स्वास्थ्य पर प्रभाव के आँकड़े उपलब्ध नहीं हैं। साल 2019 में इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन डिलीवरी सिस्टम (ENDS) पर प्रतिबंध के कारण हीटेड टोबैको प्रोडक्ट्स पर भी रोक लगा दी गई, जबकि ये दोनों अलग हैं। भारत में इन उत्पादों में अंतर करने के लिए कोई ठोस वैज्ञानिक आकलन नहीं किया गया। न ही भारत में जापान, स्वीडन, यूके, अमेरिका, न्यूजीलैंड जैसे देशों से प्राप्त विस्तृत वैज्ञानिक और वास्तविक प्रमाणों पर गौर किया गया।नतीजा यह हुआ कि भारत में सिगरेट का सेवन करने वालों को रैगुलेटेड और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित विकल्प उपलब्ध नहीं हो पाए और वे कम नुकसान वाले विकल्प चुनने के अपने अधिकार से वंचित रह गए।इस बारे में थोलोस फाउंडेशन के वाइस प्रेसिडेंट, लॉरेंज़ो मोटानारी ने कहा, ‘‘सुरक्षित निकोटीन दुनिया में कई जानें बचा रहा है। स्वीडन और जापान के साथ यूके, कनाडा, न्यूजीलैंड एवं फ्रांस में मिले अनुभवों ने साबित किया है कि जब लोगों को ज्यादा सुरक्षित विकल्प मिलते हैं, तो वे बड़ी संख्या में उन्हें चुनते हैं। अब हमारे पास ऐसे टूल्स उपलब्ध हैं, जो बड़ी संख्या में सिगरेट सेवन के नुकसानों से लड़ सकते हैं। इसलिए पूरी दुनिया की सरकारों को अपने नागरिकों की मदद करना चाहिए ताकि वे बेहतर विकल्प चुन सकें।’’भारत में तम्बाकू से होने वाली मौतों का भार विश्व में सबसे ज्यादा है। इसलिए कम नुकसान वाले निकोटीन उत्पादों पर लगाए गए प्रतिबंध पर पुनर्विचार करने की जरूरत है, ताकि जन स्वास्थ्य में सुधार लाने की संभावनाएं बढ़ सकें। युवाओं को सुरक्षा देने वाला विज्ञान पर आधारित फ्रेमवर्क व्यस्कों को ज्यादा सुरक्षित विकल्प उपलब्ध करा सकता है, जिससे भारत ग्लोबल बेस्ट प्रैक्टिस अपनाकर सिगरेट सेवन से होने वाले नुकसान को कम कर सके।


Source: Dainik Bhaskar March 05, 2026 23:10 UTC



Loading...
Loading...
  

Loading...

                           
/* -------------------------- overlay advertisemnt -------------------------- */