इतना रेडिएशन कि अपनों के शव तक नहीं मिले हिरोशिमा में बमबारी से पहले, सचिको मतसुओ के पिता को अमेरिकी विमान से गिरा एक कागज का टुकड़ा मिला था जिसमें आबादी पर हमले की बात थी। वह काम पर निकले मगर बाकी परिवार ने एक और दिन के लिए बैरक में रहने का फैसला किया। कुछ घंटों बाद धमका हुआ और जो लोग केबिन में छिपे हुए थे, वे शुरुआती असर से बच गए मगर जलन और रेडिएशन से नहीं। मतसुओ के पिता हथियारों की एक फैक्ट्री के बाहर तैनात थे। उन्हें भी बहुत चोटें आई थीं। बिना छड़ी के चला नहीं जा रहा था। उनका बड़ा बेटा भी एक सिविल डिफेंस यूनिट के साथ तैनात था, जो धमाके में मारा गया। परिवार को उसकी लाश एक छत पर मिली मगर जब तक वे उसे लेने वहां तक पहुंचते, वह भाप बन चुकी थी। मतसुओ के पिता को रेडिएशन के भयानक दुष्प्रभावों से जूझना पड़ा।कभी भूल नहीं पाएंगे वह खौफनाक मंजर तब 11 साल की रहीं योशिरो यामावाकी धमाके के अगले रोज अपने पिता को खोजने निकलीं। अधजली लाश जो राख में सनी हुई थी, को देखकर यामावाकी ने जिंदगी का सबसे तकलीफदेह अहसास हुआ। उनके पिता एक पावर प्लांट में काम करते थे, वापस नहीं लौट सके। फैक्ट्री जाते समय, यामावाकी और उनके दो भाइयों ने जो कुछ देखा, उसे ताउम्र जेहन से हटा नहीं सके। बकौल योशिरो, रास्ते में कुछ लाशें ऐसी थीं जिनकी त्वचा यूं बाहर आ रही थी जैसे पके हुए फल का छिलका, भीतर का सफेद मांस दिखता.... एक नौजवान महिला की अंतड़ियां ही बची थी... एक 6 से 7 साल के बच्चे पर कीड़े रेंग रहे थे...।
Source: Navbharat Times August 09, 2021 04:23 UTC