विज्ञापनविज्ञापनसंवाद न्यूज एजेंसीसरधना। प्रभु यीशु के पुनरोत्थान के पर्व ईस्टर से पहले मनाए जाने वाले 40 दिवसीय चालीसा काल के अंतर्गत शनिवार को ऐतिहासिक रोमन कैथोलिक चर्च में विशेष प्रार्थना सभा आयोजित की गई। मेरठ धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष भास्कर जेसुराज ने बताया कि चालीसा काल ईसाई समुदाय के लिए पश्चाताप और उपवास का समय होता है। इस अवधि में विशेष रूप से कैथोलिक अनुयायी अपने पापों को स्वीकार कर प्रभु के प्रति भक्ति व्यक्त करते हैं और प्रार्थना, पवित्र बाइबिल के ध्यान व अराधना में समय बिताते हैं।उन्होंने कहा कि जीवन में कुछ भी स्थायी नहीं है। इसलिए जब भी अवसर मिले, पुण्य कार्य करना चाहिए और दूसरों की भलाई के लिए काम करना चाहिए। मनुष्य को यह याद रखना चाहिए कि वह मिट्टी से बना है और अंततः मिट्टी में मिल जाएगा। ऐसे में सभी को अच्छा, ईमानदार और करुणामय जीवन जीने का प्रयास करना चाहिए। उपदेश देते हुए फादर मार्टिन रावत ने कहा कि चालीसा काल आत्मचिंतन और प्रायश्चित का समय है।इस दौरान सच्चे मन से ईश्वर की ओर लौटना चाहिए और सभी के लिए प्रार्थना करनी चाहिए, विशेषकर उनके लिए जिन्होंने किसी रूप में दुख पहुंचाया हो। उन्हें क्षमा करते हुए उनके हृदय परिवर्तन के लिए भी प्रार्थना करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार पतझड़ के बाद वृक्षों में नए पत्ते आते हैं, उसी प्रकार मनुष्य को भी अपने पुराने पापमय जीवन को त्याग कर प्रायश्चित के माध्यम से नया जीवन अपनाना चाहिए।इस दौरान दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने उपवास रखकर प्रभु यीशु के दुखों को स्मरण किया। चर्च में प्रभु यीशु के दुखभोग को दर्शाते हुए विशेष प्रार्थना कराई गई। श्रद्धालुओं ने पवित्र क्रूस की उपासना की और परम प्रसाद ग्रहण किया। चर्च प्रबंधन के अनुसार आगामी गुड फ्राइडे पर 3 अप्रैल को विशेष प्रार्थना सभा आयोजित की जाएगी। इसमें बड़ी संख्या में दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
Source: Dainik Bhaskar March 14, 2026 13:00 UTC