मामला मलरांका चर्च के तहत पादरियों के समूह और उनके चर्चों के नियंत्रण से जुड़ा2017 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि नियंत्रण मलरांका चर्च के ऑर्थोडॉक्स धड़े को सौंपा जाएDainik Bhaskar Jul 02, 2019, 09:45 PM ISTनई दिल्ली. चर्च के विवाद को लेकर दिए गए आदेश ना लागू करने पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केरल सरकार को फटकार लगाई। अदालत ने राज्य सरकार की तरफ से पेश वकील से पूछा कि क्या केरल कानून से ऊपर है? मामला मलरांका चर्च के तहत 1100 चर्चों और पादरियों के समूह के नियंत्रण से जुड़े आदेश के पालन का था। इस पर जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस एमआर शाह की बेंच सुनवाई कर रही थी।बेंच ने राज्य सरकार के वकील से कहा- अगर आपके मुख्य सचिव सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ जाने की मंशा रखते हैं तो हम सबको यहां खड़ा कर देंगे। क्या केरल कानून से ऊपर है? आप न्यायिक व्यवस्था का मजाक उड़ा रहे हैं।जजों ने कहा- हमने बहुत बर्दाश्त कर लियाजजों ने कहा, ‘‘अगर राज्य ने हमारे आदेशों का पालन नहीं किया तो हम मुख्य सचिव को सलाखों के पीछे भेज देंगे। क्या आपको मामले की गंभीरता समझ में आती है। हमने आप लोगों को बहुत बर्दाश्त कर लिया। इस बार हम आपके खिलाफ एक्शन लेंगे।’’सुप्रीम कोर्ट के साथ यह व्यवहार ठीक नहीं: बेंचबेंच ने कहा- देश में हो क्या रहा है? अगर उन्हें लगता है कि वे इस तरह से चीजें कर सकते हैं तो हम सभी को यहां बुला लेंगे। सुप्रीम कोर्ट के साथ व्यवहार का यह तरीका नहीं है। हमारे आदेशों का राज्य सरकार को पालन करना होगा।प्रार्थना के दौरान पुलिस सुरक्षा की मांगसेंट मैरी ऑर्थोडॉक्स चर्च ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी कि इस मामले में हाईकोर्ट द्वारा दिए गए कुछ निर्देश उच्चतम न्यायालय के आदेशों के विरोधाभासी हैं। ऑर्थोडॉक्स धड़े ने हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन कराए जाने और चर्चों में प्रार्थना के दौरान पुलिस सुरक्षा मुहैया कराए जाने की अपील की थी।सुप्रीम कोर्ट पहले ही आदेश दे चुका2017 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने मलरांका चर्च के तहत 1100 पादरियों के समूह और उनके चर्चों का नियंत्रण ऑर्थोडॉक्स धड़े को सौंपे जाने का आदेश दिया था। अदालत ने मलरांका चर्च दिशा-निर्देश 1934 का संदर्भ देते हुए यह आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपील में कहा गया था कि मलरांका चर्च का जैकब धड़ा ऑर्थोडॉक्स धड़े को चर्चों में घुसने से रोक रहा है, जबकि इस संबंध में उच्चतम न्यायालय पहले ही आदेश दे चुके हैं।
Source: Dainik Bhaskar July 02, 2019 16:07 UTC