चंडीगढ़ / हादसे में कुचले सिर के बाद डेड मदर की डिलीवरी,5 घंटे तक जीवित रहा बच्चा, समय पर मदद मिल जाती तो बच जाता - News Summed Up

चंडीगढ़ / हादसे में कुचले सिर के बाद डेड मदर की डिलीवरी,5 घंटे तक जीवित रहा बच्चा, समय पर मदद मिल जाती तो बच जाता


अमरावती मोड़ के पास ट्रक से कुचलकर धड़ से अलग हाे गया था सिरमृतक के पति ने कहा लोगों में इंसानियत नहीं बचीDainik Bhaskar Nov 17, 2019, 01:43 PM ISTपंचकूला. कालका-जीरकपुर हाईवे पर अमरावती मोड़ के समीप शनिवार सुबह पौने 11 बजे एक ट्रक चालक की लापरवाही से गर्भवती महिला सोनिया की मौत हो गई। महिला अपने पति के साथ मायके से ससुराल बाइक पर जा रही थी कि पीछे से आ रहे ट्रक का किनारा बाइक में लगा और महिला सिर के बल नीचे गिर गई।इससे महिला का सिर ट्रक के पहिए के नीचे आ गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इस हादसे के बाद ट्रक चालक मौके से फरार हो गया। बाद में मृतका को एंबुलेंस की मदद से जनरल अस्पताल पहुंचाया गया। आठ महीने की इस गर्भवती महिला के अस्पताल पहुंचते ही 5 डॉक्टरों की टीम ने मुआयना किया तो बच्चे की धड़कनें सुनाई दीं। इसके बाद टीम बच्चे को बचाने में जुट गई।पांच घंटे ही जी पाया नवजात :गायनी ओटी में सर्जरी से मृतक महिला की डिलीवरी हुई और उसे लड़का हुआ। लेकिन डॉक्टरों की लाख कोशिशों के बावजूद पांच घंटे बाद उसकी भी मौत हो गई। इलाज के दौरान नवजात की धड़कनें बार-बार गायब हो रही थीं। डॉक्टरों ने बच्चे को बचाने के लिए पीजीआई व जीएमसीएच-32 के डॉक्टरों से भी लगातार संपर्क बनाए रखा, लेकिन सारी कोशिशें कामयाब नहीं हो पाईं।आईओ संदीप कुमार ने बताया कि ट्रक चालक फरार हो गया और ट्रक को जब्त किया गया है। महिला व बच्चे के शव को देर शाम तक उनके परिजनों को हैंडओवर कर दिया गया है।सड़क हादसे में मारी गई महिला की डिलीवरी की तारीख 25 नवंबर की थी। महिला की मौत के करीब 5 घंटे बाद डॉक्टरों ने नवजात बच्चे को भी मृतक घोषित कर दिया। डॉ. रोहित ने बताया कि बार-बार बच्चे की धड़कनें कम ज्यादा होती रहीं। एंबु बैग की मदद से बच्चा सांस ले पा रहा था। 3.30 बजे के बाद बच्चे ने रिस्पॉन्ड करना भी बंद कर दिया था।महिला के पति ने रो-रोकर कहा-लोगों में नहीं बची है इंसानियत...मृतक महिला के पति तरसेम ने कहा कि लोगों में इंसानियत नहीं बची है, आधा घंटे तक बीच सड़क पर खड़े होकर गाड़ी मालिकों से अपनी पत्नी को अस्पताल ले जाने की भीख मांगता रहा, लेकिन किसी ने गाड़ी नहीं रोकी। मैं चिल्लाता रहा कि मेरी बीवी तो चली गई कम से कम मेरे बच्चे को बचाने में मदद कर दो। लेकिन किसी ने मदद नहीं की।सीनियर पीड्रिएट्रिशियन डॉ. गगन सिंगला और डॉ. रोहित ने बताया किमॉनिटर्स के माध्यम से हम बच्चे पर नजर रखते रहे। मदर की डेथ के बाद हादसे की जगह पर करीब आधे घंटे का समय बर्बाद हुआ और उसके बाद वहां से पंचकूला हॉस्पिटल में लाने में देरी लगी ।इतनी देर तक बच्चे को ऑक्सीजन नहीं मिला क्योंकि बच्चे की मां सांस नहीं ले रही थी। हां, इस तरह के केस में बचने के चांसेज काफी कम होते हैं लेकिन हमने बच्चे को बचाने की पूरी कोशिश की। पीजीआई व जीएमसीएच-32 के डॉक्टरों के लगातार संपर्क साधा गया लेकिन उसे बचा नहीं पाए।


Source: Dainik Bhaskar November 17, 2019 08:11 UTC



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