मध्यप्रदेश की 8 सीटों गुना, ग्वालियर, राजगढ़, भिंड, मुरैना, भाेपाल, सागर और विदिशा में 12 को वोटिंगभोपाल में सबसे चर्चित मुकाबला, 8 बार इस सीट पर भाजपा जीतीभोपाल इन दिनों भगवा रंग में रंगा हुआ है। यहां कांग्रेस के दिग्विजय सिंह को भाजपा की साध्वी प्रज्ञा सिंह से कड़ी चुनौती मिल रही है। भाजपा ने संघ के दबाव में मौजूदा सांसद आलोक संजर का टिकट काट कर साध्वी को उतारा है। दिग्गी राजा और साध्वी में हिंदू आतंकवाद के मुद्दे पर निजी लड़ाई छिड़ी हुई है। दिग्विजय सिंह के लिए चुनौती इसलिए भी बड़ी है, क्योंकि 8 बार से यह सीट भाजपा जीत रही है। भोपाल सीट पर वोटों का ध्रुवीकरण होता दिख रहा है। जिसका असर चौतरफा कई सीटों पर देखने को मिल सकता है। हालांकि, स्थानीय युवा राज जैन कहते हैं- धर्म की बजाय रोजगार ज्यादा महत्व रखता है। प्रज्ञा को वोट हिंदुत्व पर नहीं, मोदी के लिए देंगे।उधर, ग्वालियर-चंबल बेल्ट में इस बार बंपर गेहूं हुआ है। गुना मंडी में किसान नीलम यादव कहते हैं- डेढ़ गुना ज्यादा उपज हुई है। पानी बरसा, कोई रोग भी नहीं लगा। पर अब न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का रोग लग चुका है। सरकारी खरीद पूरी नहीं होने से 3 हजार रुपए क्विंटल वाला गेहूं 2 हजार रुपए में बेचना पड़ रहा है। गुना सिंधिया परिवार की परंपरागत सीट है। मोदी लहर में भी ज्योतिरादित्य जीते थे। वे फिर मैदान में हैं। मुकाबले में हैं- भाजपा के डाॅ. केपी यादव, जो सिंधिया के करीबी रहे हैं। यहां यादव बड़ा वोट बैंक है, लेकिन ज्योतिरादित्य मजबूत हैं। क्षेत्र की आठ विधानसभाओं में से 4 कांग्रेस और 4 भाजपा के पास है।राजगढ़ से कांग्रेसी दिग्गज दिग्विजय सिंह 2 बार और उनके भाई लक्ष्मण सिंह 5 बार सांसद रहे हैं। इस बार यहां कांग्रेस ने किराड़-धाकड़ महिला विंग की राष्ट्रीय अध्यक्ष मोना सुस्तानी को मौका दिया है। भाजपा ने ओबीसी वोट बैंक के सहारे मौजूदा सांसद रोडमल नागर पर फिर भरोसा जताया है। दोनों में कड़ी टक्कर है। ग्वालियर के भाजपा के मौजूदा सांसद नरेंद्र सिंह तोमर इस बार मुरैना से मैदान में हैं इसलिए यहां से दो बार महापौर रहे विवेक शेजवलकर को टिकट दिया गया है। कांग्रेस ने पिछली बार मोदी लहर में बेहद कम मार्जिन से हारे अशोक सिंह पर दांव खेला है। अशोक सिंह की ग्रामीण सीटों पर पकड़ है और उनका प्लस पाॅइंट यह भी है कि यहां आठ में से सात सीटों पर कांग्रेस के विधायक हैं।चंबल की भिंड सीट में त्रिकोणीय संघर्ष का फायदा हमेशा भाजपा को हुआ है। भाजपा ने यहां टिकट बदल कर संध्या रावत को उतारा है। उनका टिकट भाजपा के दिग्गज नेता नरोत्तम मिश्रा की प्रतिष्ठा से भी जुड़ा है। उधर कांग्रेस ने इंजीनियर देवाशीष जारड़िया को मुकाबले में खड़ा किया है। दोनों में बराबर का मुकाबला है। हर बार की तरह बसपा इस बार भी कांग्रेस का खेल बिगाड़ सकती है।मुरैना में अनूप मिश्रा मौजूदा सांसद हैं, लेकिन नरेन्द्र सिंह तोमर की वजह से उनका टिकट कट गया। ऐसे में यहां ब्राह्मणों की नाराजगी दिख सकती है। कांग्रेस ने पांच बार विधायक रहे मध्यप्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष रामनिवास रावत को उतारा है। मुरैना 35 सालों से भाजपा के पास है। इस बार कांग्रेस को यहां उम्मीद है। क्योंकि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने आठ में से सात सीटें जीती हैं। हालांकि बसपा के प्रत्याशी करतारसिंह भडाणा कांग्रेस की मुश्किल बन सकते हैं।विदिशा भाजपा का गढ़ है, पिछले सात चुनाव भाजपा ने ही जीते हैं। यहां से दो बार जीतीं सुषमा स्वराज इस बार नहीं लड़ रही हैं। ऐसे में भाजपा के रमाकांत भार्गव और कांग्रेस के शैलेंद्र पटेल में सीधा मुकाबला है। भाजपा छह चुनाव से सागर सीट जीत रही है। भाजपा ने सांसद लक्ष्मीनारायण यादव का टिकट काटकर यादवों से नाराजगी ले ली है जो चंबल की सीटों तक असर डालेगी। हालांकि विधानसभा में भाजपा को यहां एकतरफा जीत मिली थी। यहां उसके 7 विधायक हैं। भाजपा ने राज बहादुर को प्रत्याशी बनाया है और कांग्रेस ने प्रभांशु सिंह ठाकुर को मुकाबले में खड़ा किया है। परंतु यादवों ने पूरी ताकत से कांग्रेस का साथ दे दिया तो भाजपा को मुश्किल हो जाएगी।सबसे असरदार मुद्दे
Source: Dainik Bhaskar May 11, 2019 02:54 UTC