पाकिस्तान में सेना ही सबकुछ, अल्पसंख्यकों की बुरी हालत पाकिस्तान में सेना ही सर्वेसर्वा है। वह जब चाहे तब लोकतांत्रिक सरकार को अपदस्थ कर सत्ता पर कब्जा कर सकती है। यह कोई नहीं भूल सकता है कि कैसे पाकिस्तानी सेना ने पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टों को फांसी पर चढ़ा दिया था। इतना ही नहीं, सैन्य तानाशाह परवेज मुशर्रफ का खौफ तो अब भी लोगों के जेहन में ताजा है। कारगिल में बिना सरकार से पूछे भारत के खिलाफ न केवल जंग का ऐलान कर दिया, बल्कि बाद में नवाज शरीफ को सत्ता से हटाकर खुद राष्ट्रपति बन बैठे। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के हालात तो और बदतर हैं। वहां न केवल अल्पसंख्यकों को दोयम दर्जे का नागरिक समझा जाता है बल्कि उनके मंदिरों और चर्चों को तोड़ दिया जाता है। हिंदू और इसाई लड़कियों का अपहरण कर जबरन धर्म परिवर्तन कराया जाता है।अफगानिस्तान तो पिछले 25 साल से लड़ रहा जंग अफगानिस्तान में न केवल अल्पसंख्यकों, बल्कि वहां के मुसलमानों के हालात भी दुनिया से छिपे नहीं है। रूस और अमेरिका के हमले के पहले से ही अफगानिस्तान गृहयुद्ध की आग में जल रहा है। विश्व की दोनों ही महाशक्तियां चारों तरफ जमीन से घिरे इस देश पर कब्जा करने और तालिबान को खत्म करने पहुंची, लेकिन हालात ऐसे बने कि इन्हें अपना मिशन बीच में छोड़कर वापस लौटना पड़ा। आए दिन आईईडी विस्फोट और तालिबान के हमले की खौफ में जी रहे नागरिकों की जिंदगी का कोई भरोसा नहीं है। अति सुरक्षित समझे जाने वाले काबुल में भी लगातार आतंकी वारदातें बढ़ रही हैं। तालिबान तो यहां अस्पतालों तक को नहीं छोड़ रहा। इस बीच आईएसआईएस के आतंकी भी सीरिया से खदेड़े जाने के बाद यहां अपना ठिकाना बनाने की जुगत में हैं।बांग्लादेश में भी कट्टरवाद की भेंट चढ़ रहे अल्पसंख्यक बांग्लादेश भी कट्टरवादी ताकतों के कारण अल्पसंख्यों की सुरक्षा में फेल होता दिखाई देता हैं। कुछ महीने पहले ही जब फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस्लामिक आतंकवाद को लेकर कड़ी टिप्पणी की थी, तब सबसे अधिक विरोध बांग्लादेश में ही देखने को मिला था। राजधानी ढाका सहित कई शहरों में रोज हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करते थे। 1971 के बाद से इस देश से बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक हिंदू भागकर भारत आ गए। अपना घर, जमीन जायदाद छोड़कर भारत पहुंचे बांग्लादेशी हिंदुओं ने वहां के कट्टरपंथियों की पूरी कहानी बताई थी।आईएसआईएस के सीरिया और ईराक को किया तबाह खुद को इस्लाम का नया खलीफा घोषित करने वाले आतंकी संगठन आईएसआईएस ने सीरिया और ईराक को तबाह कर दिया। इसके आतंकियों ने तो जुर्म का नया इतिहास ही लिख दिया। इन्होंने मुसलमानों को ही नहीं छोड़ा। इतना ही नहीं, इनके कब्जे से छूटे कुर्द महिलाओं ने सेक्स स्लेव बनने की डरावनी घटनाओं को बताकर दुनिया को सकते में डाल दिया था। यहां के मुसलमान आज भी बमों और गोलियों के साए में जिंदगी गुजार रहे हैं। कई देशों की सेना भी मिलकर इन आतंकियों का खात्मा नहीं कर सकी है। सीरिया तो इस समय अमेरिका और रूस के घातक हथियारों को टेस्ट करने का सेंटर बन चुका है। दोनों देशों की सेना जमकर एक दूसरे के समर्थकों पर हमले कर रही हैं।समुद्री डाकूओं के नाम से कुख्यात है सोमालिया अफ्रीकी महाद्वीप में सबसे बड़ी समुद्री तटरेखा वाला देश सोमालिया की पहचान तो समुद्री डाकूओं के नाम पर हो रही है। पूरे इलाके में सोमालिया के डाकूओं का इतना खौफ है कि दुनियाभर की सेनाओं ने इस इलाके में डेरा डाला हुआ है। अगर सोमालिया चाहता तो रणनीतिक स्थिति के कारण अरबों डॉलर कमा सकता था। यहां न केवल दुनियाभर के देश अपनी उपस्थिति को मजबूत करते बल्कि इसे अफ्रीका का प्रवेश द्वार तक बना देते। लेकिन, सरकार के विफल होने के कारण यह देश आतंक का नया ठिकाना बनकर रह गया है।खाड़ी देशों में भी कुछ ऐसा ही हाल खाड़ी के देशों में भी हालात सामान्य नहीं है। यहां आज भी राजशाही का प्रभुत्व है, जिसके कारण लोग सरकार की आलोचना भी नहीं कर सकते हैं। यहां बाकी अल्पसंख्यों को छोड़ भी दिया जाए तो महिलाओं के साथ भेदभाव चरम पर है। सऊदी अरब सहित कई खाड़ी देशों में महिलाओं को पुरूषों के बराबर का हक नहीं है।
Source: Navbharat Times February 09, 2021 13:41 UTC