कंपनी के चेयरमैन दिनेश मित्तल बताते हैं कि 60 हजार से अधिक पदक बनाने के निर्देश मिले हुए हैंहर एक पदक का वजन 35 ग्राम होता है, एक दिन में छह हजार पदक बनाए जा सकते हैंDainik Bhaskar Jan 26, 2020, 10:21 AM ISTइंदौर (संजय गुप्ता). हमारे देश की नौसेना विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी नौसेना है। इसमें 60 हजार से ज्यादा नौसैनिक हैं। देश सेवा के दौरान बहादुरी, समर्पण, त्याग के लिए इनमें से कई सैनिकों को हर साल अलग-अलग अवसरों पर पदकों से सम्मानित किया जाता है। गर्व की बात है कि यह पदक देश में केवल हमारे पीथमपुर में बन रहे हैं।पांच हजार किलो धातु का उपयोगमित्तल एप्लायसेंस लिमिटेड कंपनी चांदी, क्यूप्रो निकल आदि मेटल्स के पदक बनाकर नौसेना को भेजे जा रहे हैं।कंपनी के चेयरमैन दिनेश मित्तल बताते हैं कि 60 हजार से अधिक पदक बनाने के निर्देश मिले हुए हैं। हर एक पदक का वजन 35 ग्राम होता है।इन पदकों को बनाने में करीब पांच हजार किलो धातु का उपयोग किया जा रहा है। एक दिन में छह हजार पदक बनाए जा सकते हैं। इस तरह मेडल पर अशोक स्तंभ अंकित किया जाता है।ये पदक यहां बन रहे हैंनाइन ईयर्स लांग सर्विस मेडल, 20 ईयर्स लांग सर्विस मेडल, 30 ईयर्स लांग सर्विस मेडल, विदेश सेवा मेडल, सैन्य सेवा मेडल, सामान्य सेवा मेडल, स्पेशल सर्विस मेडल, लांग सर्विस एंड गुड कंडक्ट मेडल, मैरिटोरियस सर्विस मेडल, वाउंड मेडल, 50 ईयर्स इंडिपेंडेंस मेडल आदि।हर पदक के लिए अलग चिन्हपदक बनाने में काफी बारीकी रखी जाती है। नौसेना द्वारा हर पदक के लिए अलग चिन्ह तय हैं, वजन भी कम-ज्यादा नहीं होना चाहिए पदक के नीचे गोलाई में पदक पाने वाले का नाम भी लिखा जाता है।
Source: Dainik Bhaskar January 26, 2020 03:33 UTC