Dainik Bhaskar May 06, 2019, 01:39 PM ISTसामुदायिक और सरकारी कॉलेजों में स्थिति गंभीरकाया लेटरमेनअमेरिका में बड़ी संख्या में कॉलेज छात्रों को रात का खाना नसीब नहीं होता है। ताजा आंकड़ों से संकेत मिले हैं कि समस्या गंभीर है। सामुदायिक और सरकारी कॉलेजों में लगभग आधे छात्र भूखे रहते हैं। टेंपल यूनिवर्सिटी के कॉलेज होप सेंटर के एक सर्वे में बताया गया है कि 100 से अधिक कॉलेजों के 45% छात्रों का कहना है कि वे पिछले एक माह से भरपेट खाना नहीं खा सके हैं। न्यूयॉर्क में 48% छात्रों की यही स्थिति पाई गई है।लीमैन कॉलेज की कैसांड्रा मोंटेस ने ग्रेजुएशन पढ़ाई पूरी करने के लिए इस वर्ष साढ़े तीन लाख रुपए कर्ज लिया है। वे दो पार्ट टाइम जॉब करती हैं। उनके हर सप्ताह खाने का बजट केवल एक हजार रुपए है। वे कॉलेज कैंपस की फूड पेंट्री से किराने का सामान लेती हैं। वे अक्सर नाश्ता नहीं करती हैं ताकि उनके चार वर्ष के बच्चे को नियमित खाना मिल सके। इस स्थिति के बीच अमेरिका के कॉलेजों में फूड पेंट्री खोलने का अभियान चल रहा है। कॉलेज, यूनिवर्सिटी के फूड बैंक संस्थानों में 700 सदस्य हैं। ये बैंक होटलों और केटरिंग के स्थानों से बचा खाना इकट्ठा कर छात्रों के बीच बांटते हैं। अब छात्रों को मुफ्त खाना देने और उनके अन्य खर्च के लिए सरकारी मदद दिलाने की पहल चल रही है।सामुदायिक और सरकारी कॉलेजों में ज्यादातर गरीब छात्र पढ़ते हैं। कुनी ग्रेजुएट स्कूल के प्रोफेसर निकोलस फ्रूडेनबर्ग का कहना है, खाने की व्यवस्था करने के लिए छात्रों को दूसरा काम करना पड़ सकता है। इससे पढ़ाई प्रभावित होगी। समस्या का एक अन्य पहलू जीवन-यापन के बढ़ते खर्च से जुड़ा है। अमेरिका में छात्रों पर कर्ज 10.5 लाख करोड़ रु. हो चुका है। न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में पढ़ते हुए केल्विन रेमसे पर भारी कर्ज चढ़ गया। वे बताते हैं, खाना बहुत महंगा है।सिटी यूनिवर्सिटी न्यूयॉर्क ने पोषण आहार कार्यक्रम (स्नैप ) से करार किया है। इसके तहत स्वयंसेवी संस्थाएं यूनिवर्सिटी के एक लाख 22000 छात्रों को हर वर्ष दो लाख रुपए से अधिक की सहायता करती हैं। अलग- अलग राज्यों में कई संस्थाएं छात्रों के लिए पेंट्री चला रही हैं।दैनिक भास्कर से विशेष अनुबंध के तहत
Source: Dainik Bhaskar May 06, 2019 07:52 UTC