अमरोहा: मेरठ से प्रयागराज तक बनने वाले गंगा एक्सप्रेस-वे के निर्माण में किसानों के निजी नलकूप बाधा बन सकते हैं। इसको दूर कराने के लिए अधिकारियों ने उनकी कीमत तय करने का फैसला लिया है। रास्ते में आने वाले स्ट्रैक्चरों का भी मूल्य निर्धारित करने के लिए कहा है। इसके अलावा सरकारी जमीन के पुनर्ग्रहण करने के लिए कार्रवाई छेड़ने के निर्देश संबंधित विभाग के अधिकारियों को दिए गए।गंगा एक्सप्रेस-वे का निर्माण सरकार की पहली प्राथमिकता है। इसे मेरठ से प्रयागराज तक बनाया जाएगा। यह जनपद के 26 गांवों से होकर निकलेगा। इसके लिए किसानों से जमीन खरीदी जाएगी। इसकी जिम्मेदारी हसनपुर तहसीलदार को सौंपी गई है। एक्सप्रेस-वे के निर्माण का दायित्व उत्तर प्रदेश विकास प्राधिकरण को सौंपा गया है। सोमवार की दोपहर करीब एक बजे अपर जिलाधिकारी विनय कुमार सिंह ने कलक्ट्रेट सभागार में यूपीडा के डिप्टी कलेक्टर संजय यादव, कार्यदायी संस्था के अलावा लघु सिचाई, वन विभाग व लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों की बैठक ली।इसमें उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वन विभाग की जितनी भी जमीन एक्सप्रेस वे निर्माण में आ रही है, उसका पुनर्ग्रहण करने की कार्रवाई छेड़ी जाए। जो भी स्ट्रैक्चर बीच में आ रहा है, उसका मूल्य तय किया जाए। इस दौरान अधिकारियों ने बताया कि 20 निजी नलकूप भी निर्माण के दौरान आएंगे। इस पर एडीएम ने उनका मूल्य निर्धारण के निर्देश लघु सिचाई विभाग को दिए हैं। लोनिवि अधिकारियों से भी पूरी स्थिति का ब्योरा तैयार करने के लिए कहा है। आज से फिर शुरू होगा सर्वे का कार्यअमरोहा: जनपद के 26 गांवों में खतौनी के हिसाब से यूपीडा द्वारा सर्वे किया गया था लेकिन, उसमें अंतर आ रहा है। अपर जिलाधिकारी विनय कुमार सिंह ने कहा कि मंगलवार की सुबह से फिर सभी गांवों में सर्वे का काम चालू कराया जाएगा। इसके लिए अधिकारियों को निर्देशित कर दिया गया है।शॉर्ट मे जानें सभी बड़ी खबरें और पायें ई-पेपर,ऑडियो न्यूज़,और अन्य सर्विस, डाउनलोड जागरण ऐप
Source: Dainik Jagran December 28, 2020 17:26 UTC