4 /6 नरेंद्र मोदी: बेचैनी, तनाव और उदासी का सबबप्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी का जन्म 17 सितंबर, 1950 की दोपहर को लगभग 12 बजे मेहसाणा, गुजरात के वडनगर में हुआ था। यदि उनका यह जन्म विवरण सत्य है, तो मोदी की कुंडली इस प्रकार है।मोदी की कुंडली के लग्न में लग्नेश मंगल, भाग्येश चंद्रमा के साथ, पराक्रमेश और सुखेश शनि कर्म भाव में सप्तमेश और व्ययेश शुक्र के साथ, राहु पंचम भाव में शत्रु सूर्य के घर में और बुध एकादश में स्वाग्रही होकर मित्र सूर्य और केतु के साथ विराजमान है। लग्न का स्वग्रही मंगल इन्हें अदम्य साहसी, जुझारू, ऊर्जावान और सक्रिय बना रहा है और विरोधियों का फ्यूज उड़ा रहा है। मंगल के साथ भाग्य के स्वामी चंद्रमा का सहयोग इन्हें विचारशीलता के साथ विलक्षण क्षमता प्रदान कर रहा है। शनि की मूल त्रिकोण राशि कुंभ, केंद्र में है। यह स्थिति इन्हें दूरदर्शिता, चातुर्य, बुद्धिमत्ता प्रदान कर भावों के संप्रेषण की कला में माहिर बना रही है। कर्म भाव का शनि एक ऐसे चतुर राजनेता का निर्माण करता है, जो जल्दी हार नहीं मानता और कर्म के शनि के साथ शुक्र की युति एक शक्तिशाली राजयोग निर्मित करती है। राजनीति की शतरंज के बिसात पर ऐसे लोग आगे की कई चाल पहले ही चल देने के लिए जाने जाते हैं। मोदी जनवरी, 2011 से भाग्येश चंद्रमा की महादशा भोग रहे हैं, जो उनके जीवन काल की श्रेष्ठ दशाओं में से एक है। इस शुक्र की अंतर्दशा में शनि का प्रत्यंतर भोग रहे हैं जो बेचैनी, तनाव और उदासी का सबब बनेगा। पर उनके हौसले में कमी के संकेत नहीं मिल रहे हैं। 22 मार्च 2020 तक का कालखंड मोदी की पेशानी पर महीन सिलवटें ला सकता है। इसके बाद जब बुध का प्रत्यंतर शुरू होगा, थोड़ी राहत मिलेगी। 17 जून 2020 से केतु के प्रत्यंतर का आगाज होगा जो चातुर्य से विजय और किसी करीबी की भूल से तनाव का सूत्रपात करेगा।
Source: Navbharat Times December 30, 2019 09:43 UTC