क्या भारत की जिम्मेदारी थी US अटैक से ईरानी युद्धपोत को बचाना? नौसेना ने कहा था- हमें सब पता है - News Summed Up

क्या भारत की जिम्मेदारी थी US अटैक से ईरानी युद्धपोत को बचाना? नौसेना ने कहा था- हमें सब पता है


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। हिंद महासागर में हुए हालिया घटनाक्रम ने भारत की सामरिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ईरानी नौसेना का 'फ्रिगेट आईरिस देना' 4 मार्च 2026 को श्रीलंका के गैले तट से लगभग 40 नॉटिकल मील दूर अंतरराष्ट्रीय जल में अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा टॉरपीडो हमले में डुबो दिया गया। इस हमले में 80 से अधिक नाविक मारे गए, जबकि श्रीलंकाई नौसेना ने 32 घायल नाविकों को बचाया। कई अन्य लापता बताए जा रहे हैं।युद्धाभ्यास के लिए भारत आया था ईरानी जहाज यह जहाज 16 फरवरी को भारत के विशाखापत्तनम पहुंचा था, जहां वह 'अंतर्राष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा 2026' और 'बहुपक्षीय अभ्यास मिलन-2026' में अतिथि के रूप में शामिल हुआ था। भारतीय पूर्वी नौसेना कमान ने इसे दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंधों के प्रतीक बताया था।यह अभ्यास 25 फरवरी को खत्म हुआ। उसके मात्र तीन दिन बाद, 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' शुरू कर दिया, जिसके तहत यह हमला हुआ। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पेंटागन में पुष्टि की कि यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा दुश्मन युद्धपोत को टॉरपीडो से डुबोने का पहला मामला है। अमेरिका ने इसे 'शांत मौत' करार दिया तो वहीं, ईरान ने इसे समुद्र में अत्याचार बताया और बदला लेने की चेतावनी दी।भारत की चुप्पी पर सवाल भारत ने घटना के बाद अपने जल क्षेत्र में नौसैनिक बल भेजे, लेकिन केंद्र सरकार ने चुप्पी साधे रखी। न तो हमले की निंदा की गई, न आक्रोश जताया गया और न ही अमेरिका के खिलाफ कोई राजनयिक विरोध दर्ज किया गया। इस चुप्पी ने देश में राजनीतिक बखेड़ा खड़ा कर दिया। विपक्षी दलों ने सवाल उठाया कि क्या भारत को हमले की पूर्व सूचना थी? कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री की खामोशी पर सवाल उठाए।कौन-क्या कर रहा की जानकारी: नौसेना प्रमुख कानूनी और रणनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना भारत के अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) और खोज-बचाव क्षेत्र से बाहर हुई। अंतरराष्ट्रीय जल में ईरानी युद्धपोत सशस्त्र संघर्ष के कानूनों के तहत वैध लक्ष्य था। LEMOA समझौते के तहत भी हर मामले में साफ सहमति जरूरी है।2024 में भारतीय नौसेना प्रमुख ने घोषणा की थी कि भारत को हिंद महासागर में 'कौन क्या, कहां और कैसे कर रहा है?' की पूरी जानकारी है। कुछ ही दिनों बाद, भारतीय बंदरगाह से रवाना हुआ जहाज उसी क्षेत्र में डूब गया।


Source: Dainik Jagran March 06, 2026 17:08 UTC



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