नई दिल्ली, एजेंसी। भारतीय सेना ने हिमालय पर खींची गई लंबे चौड़े रहस्यमय पदचिन्हों की तस्वीरें ट्विटर पर जारी करके दुनिया भर में लोगों की जिज्ञासा जगा दी है। सेना ने कहा है कि ऐसा लगता है कि मकालू बरुण नेशनल पार्क के नजदीक पाए गए 32x15 इंच वाले ये रहस्यमय पदचिन्ह पौराणिक हिममानव 'येती' के हैं। सेना की मानें तो मकालू बरुण नेशनल पार्क में कम दिखने वाला ऐसा हिममानव पहले भी देखा गया गया है। दरअसल, ऐसे विशालकाय हिममानव 'येती' को लेकर कई कहानियां लोगों के कौतूहल का केंद्र रही हैं। आइये जानते हैं 'येती' को लेकर कुछ दिलचस्प तथ्य जो पहले भी लोगों की जिज्ञासा जगाते रहे हैं...नेपाली लोकगीतों में भी जिक्रवर्षों तक 'येती' की मौजूदगी, उसके पैरों के निशान, उसके बाल आदि को लेकर कहानियां आती रहीं। इन सबके बावजूद इस विचित्र प्राणी की कोई तस्वीर सामने नहीं आई। नेपाली लोकगीतों में 'येती' का जिक्र एक बंदर जैसे हिममानव के तौर पर सामने आता है। इसे औसत इंसान की कद-काठी से लंबा बताया गया है। मान्यता है कि यह हिमालय, साइबेरिया, मध्य और पूर्वी एशिया में रहता है।यह भी पढ़ें : पहली बार सामने आए हिममानव 'येति' के होने के सबूत, भारतीय सेना ने शेयर की तस्वीरेंबड़े पत्थर वाला हथियार लेकर चलता है...19वीं शताब्दी से पूर्व 'येती' के बारे में मान्यता थी कि यह ग्लेशियरों में रहने वाला ऐसा आदिम प्राणी है जिसकी स्थानीय समुदाय के लोग पूजा करते थे। ऐसा कहा जाता है कि वानर जैसा यह जीव एक बड़े पत्थर वाला हथियार लेकर चलता है और सीटी जैसी आवाज निकालता है। 1920 के दशक से नेपाली पर्वतारोहियों के जेहन में हिमालय पर विचरण करने वाले इस झबरीले जीव की कहानियां घर कर गई थीं। पर्वतारोहियों में इस जीव को एकबार देख लेने की ललक भी रही।हिमालयी क्षेत्र में अजब-गजब हैं 'येती' के नामहिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले लोग इस अजीब प्राणी को 'येती' या 'मेह-तेह' जैसे विभिन्न नामों से जानते रहे हैं। तिब्बती भाषा में इसे 'मिचे' कहा जाता है, जिसका अर्थ 'मैन बीयर' (man bear) होता है। तिब्बती लोग इसे 'दजू-तेह' भी बुलाते हैं, जिसका मतलब हिमालयी भालू होता है। इसके दूसरे नामों में 'मिगोई' (Tibetan for wild man), बून मिंची (नेपाली में जंगली मनुष्य), मिरका और कांग आदमी भी चर्चित हैं।वैज्ञानिकों को कम ही मिले हैं सबूतहिम मानव येति हिमालय में रहने वाला सबसे रहस्यमयी प्राणी है। कई दशक पहले इसे नेपाल और तिब्बत के हिमालय क्षेत्र में देखे जाने के दावे किए गए। हालांकि, इन दावों को लेकर वैज्ञानिक एकमत नहीं हैं। इन दावों के पक्ष में कोई सबूत सामने नहीं आ पाए हैं। वैज्ञानिक समुदाय इन दावों को कपोल कल्पित बताता रहा है। अब तक वैज्ञानिक समुदाय को 'येती' की मौजूदगी के जो साक्ष्य ही मिले हैं, उनमें से कुछ पर साल 2017 में अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं के एक समूह ने शोध किया। हिमालयी क्षेत्र से जुटाए गए इन नमूनों के अध्ययन के निष्कर्षों में वैज्ञानिकों ने पाया था कि ये नमूने भालुओं से संबंधित थे।Posted By: Krishna Bihari Singh
Source: Dainik Jagran April 30, 2019 09:29 UTC