जागरण संवाददाता, कानपुर देहात : ओवरलोड वाहनों का दंश जिले की पुलियां व सड़कें झेल रही हैं। इनमें भी सबसे अधिक नुकसान पुलिया को हुआ है। मौजूदा समय में ही छुइया नाले का पुल व सिठमरा पुल धंस चुका है। यहां से आवागमन बंद हो चुका है। साल भर में इनकी मरम्मत में करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन ओवरलोडिग जो असल वजह है उस पर रोकथाम नहीं लग पा रहा है।ओवरलोड वाहन जहां हादसे का सबब बनते है वहीं इससे ज्यादा यह सड़क व पुल की हालत खराब कर देते हैं। जिले में अगर सबसे अधिक ओवरलोड वाहनों के चलने व उससे सड़क टूटने की बात करें तो गजनेर नबीपुर मार्ग, झांसी हाईवे, रूरा मिडाकुआं मार्ग, रसूलाबाद लहरापुर मार्ग प्रमुख हैं। इन मार्गों की हालत खराब है और यहां रोजाना हिचकोले खाते हुए वाहन सवार गुजरते हुए व्यवस्था को कोसते हैं। ओवरलोड वाहन के कारण ही चार दिन पहले छुइया नाले का पुल बुरी तरह से धंस गया और हालत यह हो गई है कि करीब डेढ़ मीटर लंबाई व चौड़ाई में नीचे झुक गया है। वहीं सिठमरा का 150 वर्ष पुराना पुल भी ओवरलोड वाहनों का शिकार हो गय। सोमवार को यह पुल धंस गया और इस पर भी आवागमन ठप हो गया। झांसी हाईवे पर तो बड़ी बड़ी नालियां बन गई हैं क्योंकि ओवरलोड वाहनों के दबाव से ट्रकों के पहिये के निशान बन जाते हैं। एआरटीओ मनोज वर्मा ने बताया कि जल्द ही 150 वाहनों पर कार्रवाई की गई है। टीमें सक्रिय कर और तेजी से अभियान चलाया जाएगा।ओवरलोड वाहनों के संचालन से पहले करते रेकीओवरलोड वाहन रात में कई संख्या में गुजरते हैं और इनके आगे भी कार सवार लोग चलते हैं। यह रेकी करते हैं कि कहीं कोई टीम चेकिग या कार्रवाई करने में तो नहीं लगी है। इसके अलावा प्रभावशील लोग भी इन ओवरलोड वाहनों को चलवाने व विभागीय मिलीभगत में शामिल रहते हैं।शॉर्ट मे जानें सभी बड़ी खबरें और पायें ई-पेपर,ऑडियो न्यूज़,और अन्य सर्विस, डाउनलोड जागरण ऐप
Source: Dainik Jagran February 09, 2021 14:48 UTC