Dainik Bhaskar May 16, 2019, 11:30 AM ISTनक्सली संगठन में रहते पहली बार महिला सदस्य मां बनीनक्सली सुनीता ने बताया- गर्भपात हो जाए इसके लिए मुझे मीलों पैदल चलाया और कई दिनों तक कम खाना दियाबच्ची का जन्म जंगल में हुआ, वह कमजोर है और हालत अभी भी ठीक नहीं हैकांकेर (छत्तीसगढ़). नक्सली संगठन में रहते पहली बार महिला सदस्य मां बनी। सुनीता ने बेटी को जन्म दिया। इससे पहले उसे काफी प्रताड़ित और परेशान किया गया। गर्भपात हो जाए इसके लिए नक्सलियों ने उसे मीलों चलाया। इससे भी मंसूबे कामयाब नहीं हुए तो पहाड़ चढ़ाया। शारीरिक रूप से कमजोर रहे इसके लिए खाना भी कम दिया।सुनीता ने बताया, "जब उनके सभी प्रयास असफल हो गए तो उसे कोयलीबेड़ा के चिलपरस गांव के बाहर जंगल में तड़पता हुआ छोड़ भाग गए। मैंने 2 मई को बच्ची को जंगल में जन्म दिया। मेरे पास कोई नहीं था।" बच्ची कमजोर है, हालत भी ठीक नहीं। 15 दिन की बच्ची का वजन 1.83 किलो है। अभी बच्ची डॉक्टर्स की निगरानी में है।बच्ची के जन्म के बाद महिला ने सरेंडर कियाएक लाख की इनामी महिला नक्सली सुनीता उर्फ हुंगी कट्टम सुकमा के चिंतलनार में रहती है। कुछ साल से वह उत्तर बस्तर डिवीजन कांकेर तहत कुएमारी एलओएस की सक्रिय सदस्य के रूप में काम कर रही थी।2018 में किसकोड़ो एरिया कमेटी के प्लाटून नंबर 7 के सदस्य मुन्ना मंडावी निवासी मेट्टाम थाना किस्टारम जिला सुकमा से उसकी मुलाकात हुई। दोनों ने संगठन में रहते बच्चे न पैदा करने की नक्सली शर्त के साथ शादी कर ली। लेकिन सुनीता गर्भवती हो गई। यह जानकारी साथी नक्सलियों को भी पता चली तो उन्होंने शर्त का पालन करने का दबाब बनाया।अंतागढ़ एसडीओपी पुप्लेश कुमार ने बताया कि 12 मई को जब इसकी जानकारी मिली तो हमने महिला नक्सली से संपर्क किया। उसे समझाया और बच्ची का इलाज शुरू कराया गया। इसके बाद उसने नक्सलवाद को अलविदा कर 15 मई को आत्मसमर्पण कर दिया।महिला नक्सली ने संगठन में रखने से मना कर दिया, इसलिए तड़पता छोड़ गए माओवादीएसपी केएल ध्रुव ने बताया, "पहली बार नक्सल संगठन में रहते सुनीता नाम की महिला ने एक बच्ची को जन्म दिया है। सुनीता 2014 में सुकमा के बासागुड़ा एलओएस में भर्ती हुई। अप्रैल 2015 में उसे दक्षिण बस्तर डिवीजन से 20 साथियों के साथ उत्तर बस्तर कांकेर डिवीजन भेजा गया, यहां वह कुएमारी एलओएस में काम करने लगी। सुनीता मार्च 2018 में ताड़ोकी के मसपुर में हुए हमले में शामिल थी, जिसमें बीएसएफ के दो जवान, एक अस्सिटेंट कमांडेंट और एक आरक्षक शहीद हुए थे।""12 मई को सूचना मिली की कोयलीबेड़ा के गांव चिलपरस में एक महिला नक्सली नवजात शिशु के साथ है। पुलिस ने गांव के घेराबंदी कर उसे खोज निकाला। नवजात काफी कमजोर था। महिला की स्थिति भी ठीक नहीं थी।बच्चा दूध भी नहीं पी पा रहा था। जिसे देख गश्ती टीम तत्काल महिला और नवजात को इलाज के लिए कोयलीबेड़ा लेकर पहुंची। महिला को यहां से अंतागढ़ फिर वहां से कांकेर रेफर किया गया। जिला अस्पताल के आईसीयू में ननवजात का इलाज चल रहा है।""नक्सलियों ने रात में चिलपरस गांव के बाहर सुनीता को तड़पता छोड़ दिया था। पानीडोबीर एलओएस कमांडर मीना नेताम के कहने पर सुनीता को छोड़ा गया। मीना ने सुनीता को संगठन में रखने से मना कर दिया था। जिसके बाद वह गांव के एक घर में पनाह लेकर रह रही थी। घटना के बाद सुनीता ने नक्सलवाद से मुंह मोड़ लिया। इस बीच आत्मसमर्पित नक्सलियों ने उसे पुनर्वास योजना की जानकारी दी, जिसके बाद महिला 15 मई को एसपी ऑफिस आई और आत्मसमर्पण किया। योजना के तहत उसे तत्काल 10 हजार रुपए प्रोत्साहन राशि दी गई।"23 मई को देखिए सबसे तेज चुनाव नतीजे भास्कर APP पर
Source: Dainik Bhaskar May 16, 2019 03:10 UTC