लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आप सभी को वो दौर तो जरूर याद होगा, जब नौकरी छोड़ना किसी 'सीक्रेट मिशन' जैसा होता था? दस बार सोचना, लोगों से सलाह लेना और फिर कांपते हाथों से अपना रेजिग्नेशन का मेल सेंड करना। पहले नौकरी छोड़ने का यही तरीका हुआ करता था, लेकिन अब जमाना बदल गया है।आज के युवा, खासकर Gen-Z, नौकरी छोड़ने को किसी सदमे की तरह नहीं, बल्कि आजादी के जश्न की तरह मना रहे हैं। इंस्टाग्राम पर "आई क्विट" (I Quit) लिखे हुए केक से लेकर ऑफिस में शानदार फेयरवेल पार्टी तक, पिछले कुछ समय में आखिर नौकरी छोड़ने का यह नया ट्रेंड हमारे काम करने के तरीके के बारे में क्या कहता है? आइए इसे समझते हैं।खौफ से जश्न तक का सफर एक समय था जब मिलेनियल्स (Millennials) इस्तीफा देने से पहले हफ्तों तक टेंशन में रहते थे। उनके लिए नौकरी सिर्फ एक काम नहीं, बल्कि उनकी पूरी पहचान हुआ करती थी, लेकिन आज की जेनरेशन ने इस सोच को पूरी तरह से बदलकर रख दिया है। अब सोशल मीडिया पर नौकरी छोड़ने की पोस्ट्स किसी 'अचीवमेंट' या आजादी की तरह शेयर की जाती हैं।क्यों बदल रहा ट्रेंड? इसका सीधा कनेक्शन हमारे पुराने वर्क कल्चर से है। दिन-रात काम करना, वीकेंड पर भी लैपटॉप से चिपके रहना, बिना थके प्रोडक्टिव बने रहने का दिखावा करना, सब हमारे काम का हिस्सा हुआ करते थे। हालांकि, आज की पीढ़ी इस थका देने वाली और टॉक्सिक जॉब को छोड़ती है, तो इसका जश्न मनाती है, क्योंकि उनके लिए यह सिर्फ एक कंपनी बदलना नहीं होता; बल्कि उस दमघोंटू लाइफस्टाइल से मिली आजादी होती है। आजादी या सिर्फ दिखावा? एक्सपर्ट्स की मानें, तो जश्न मनाने का यह तरीका सिर्फ आजादी से कई बढ़कर है। असल में यह नया तरीका थोड़ी बगावत, थोड़ा सोशल मीडिया का दिखावा और थोड़ा कम धैर्य होने का मिला-जुला रूप है।आज के समय में नौकरी छोड़ना भी पर्सनल ब्रांडिंग का एक टूल बन गया है। पिछली पीढ़ियों के मुकाबले आज के युवा अपनी परेशानियों को अंदर दबाकर रखने के बजाय, उस पर खुलकर बात करना और जश्न मनाना पसंद करते हैं।सैलरी से ज्यादा मेंटल पीस की डिमांड इन 'रेजिग्नेशन पार्टियों' के पीछे का असली मैसेज बहुत गहरा है। यह काम और निजी जिंदगी के बीच एक सही संतुलन की मांग है। आज के युवा यह समझ चुके हैं कि काम के बाहर भी एक जिंदगी है, जिसके लिए उन्हें किसी को सफाई देने की जरूरत नहीं है।
Source: Dainik Jagran April 10, 2026 17:27 UTC