स्वतंत्र देव सिंह (ट्विटर फोटो)हाइलाइट्स उत्तर प्रदेश में बीजेपी ने स्वतंत्र देव सिंह को बनाया नया प्रदेश अध्यक्ष2014 चुनाव के दौरान मोदी की रैलियों के प्रभारी रह चुके हैं स्वतंत्र देव2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने मध्य प्रदेश का प्रभारी बनाया था1988 में विद्यार्थी परिषद के संगठन मंत्री के तौर पर शुरू किया सफर2014 के चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों के प्रभारी थे स्वतंत्र देव सिंहयोगी आदित्यनाथ की सरकार में स्वतंत्र देव को परिवहन मंत्री की जिम्मेदारी मिली थीपूरे प्रदेश में बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच जमीनी पकड़ वाले नेता माने जाते हैं स्वतंत्र देव सिंहउत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने स्वतंत्र देव सिंह को नया अध्यक्ष बनाया है। इसे 2022 के विधानसभा और इस साल होने वाले उपचुनाव से पहले ओबीसी वोटरों में पैठ बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। लोकसभा चुनाव के दौरान मध्य प्रदेश में कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को उनके गढ़ में शिकस्त देने के पीछे स्वतंत्र देव सिंह का दिमाग माना जाता है। इस कामयाबी से स्वतंत्र देव सिंह संगठन में और मजबूत हो गए।2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की बंपर जीत के बाद योगी आदित्यनाथ की सरकार में उन्हें परिवहन मंत्री बनाया गया। मंत्री पद के अलावा अमित शाह लगातार उन्हें गुजरात और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों का चुनाव प्रभारी बनाते रहे। हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में उन्हें मध्य प्रदेश का प्रभारी बनाया गया था, जहां उन्होंने खास तौर से गुना लोकसभा में काफी काम किया था। इसकी बदौलत पार्टी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे कद्दावर नेता को मात दे दी। 2014 की मोदी लहर में भी सिंधिया ने अपनी सीट 1.2 लाख वोटों से ज्यादा के अंतर से जीती थी। लेकिन 2019 में बीजेपी ने इस किले पर भी कब्जा कर लिया। इस विजय ने संगठन में स्वतंत्र देव का कद बढ़ाने में और मदद की।सोमवार को यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली में शाह और बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर मुलाकात की थी। यूपी बीजेपी के नए बॉस स्वतंत्र देव कुर्मी जाति से आते हैं। ऐसे में उनकी नियुक्ति को राज्य में ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) वोटरों में पार्टी की पैठ बढ़ाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। उन्होंने पार्टी के लिए जमीनी स्तर पर काफी काम किया है। वह बीजेपी के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हैं, जिनकी पूरे राज्य के पार्टी कार्यकर्ताओं पर पकड़ है।1988 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संगठन मंत्री के तौर पर सफर शुरू करने वाले स्वतंत्र देव युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष और बीजेपी के प्रदेश महामंत्री रह चुके हैं। सिंह को 2001 में भारतीय जनता युवा मोर्चा (बीजेवाईएम) का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। इस दौरान उन्होंने बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ रिश्ता मजबूत करने के लिए सभी जिलों में काम किया था। पार्टी में उनके काम को देखते हुए उन्हें लगातार तीन बार राज्य महासचिव भी नियुक्त किया गया।मिर्जापुर में पैदा होने वाले सिंह बाद में अपने भाई के साथ बुंदेलखंड के जालौन जिले में बस गए और उन्होंने उसे ही अपनी कर्मभूमि बना ली। 2012 में उन्होंने उरई विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए थे। सिंह को 2014 लोकसभा चुनाव के दौरान यूपी में नरेंद्र मोदी की रैलियों का प्रभारी बनाया गया था। कार्यकर्ताओं पर उनकी मजबूत पकड़ और सांगठनिक कौशल से मोदी और शाह काफी प्रभावित हुए।संगठन के कामों में शाह उनका ही इस्तेमाल करते रहे हैं। सदस्यता अभियान हो या पिछले विधानसभा चुनावों में मोदी की रैलियों की व्यवस्था देखना, सब स्वतंत्र देव की ही जिम्मे रहा। 2014 के लोकसभा चुनाव में उम्मीदवारों के चयन में उनकी सलाह काफी अहम साबित हुई और पार्टी ने ज्यादातर सीटों पर चुनाव जीता। 2017 में एक बार फिर यूपी विधानसभा चुनाव में उन्होंने काफी अहम भूमिका निभाई और उनका नाम मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में शामिल था।डेप्युटी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के बाद स्वतंत्र देव ही यूपी बीजेपी के बड़े पिछड़े चेहरों में शुमार हैं। 2017 में पार्टी ने मौर्य को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर विधानसभा चुनाव लड़ा और जोरदार जीत हासिल की। अब पार्टी के निशाने पर हाल में होने वाले 12 विधानसभा सीटों के उपचुनाव और 2022 में सजने वाला विधानसभा का रण है। बीजेपी का मानना है कि यूपी में पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग उसका बड़ा वोट बैंक है। ये वर्ग पार्टी के परंपरागत सवर्ण वोटर से मिलकर जीत की राह को आसान बनाएंगे।
Source: Navbharat Times July 17, 2019 05:03 UTC