हाइलाइट्स कुलभूषण जाधव केस में भारत को बड़ी कामयाबी, ICJ ने फांसी की सजा पर लगाई रोकICJ ने पाकिस्तान को सजा की समीक्षा करने का दिया आदेश, तबतक नहीं दी जाएगी फांसीICJ ने पाकिस्तान को आदेश दिया है कि वह जाधव तक भारत को कंसुलर ऐक्सेस देICJ ने 15-1 के बहुमत से भारत के पक्ष को ठहराया सही, इकलौते पाकिस्तानी जज ने किया विरोधICJ में पाकिस्तान की तरफ से पेश वकीलकुलभूषण जाधव केस में इंटरनैशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस ने बुधवार को अपना फैसला सुनाते हुए उनकी फांसी की सजा पर रोक लगा दी। कोर्ट ने पाकिस्तान को वियना कन्वेंशन के तहत भारत को कुलभूषण जाधव तक कंसुलर ऐक्सेस मुहैया कराने और फांसी की सजा की समीक्षा का आदेश दिया। आइए आपको सिलसिलेवार ढंग से बताते हैं कि ICJ ने अपने फैसले में किन-किन मुद्दों पर क्या कहा और कैसे पाकिस्तान की दलीलें खारिज होती चली गईं।ICJ के जजों ने सर्वसम्मति से माना कि उनके पास 8 मई 2017 को भारत की तरफ से दर्ज कराए गए आवेदन को स्वीकार करने का अधिकार है। ICJ ने कहा कि कंसुलर रिलेशंस पर 24 अप्रैल 1963 के वियना कन्वेंशन के मुताबिक मामला उसके अधिकार क्षेत्र में आता है।पाकिस्तान ने दलील दी थी कि भारत का आवेदन स्वीकार करने योग्य नहीं है। ICJ ने 15-1 के बहुमत से इस्लामाबाद की इस आपत्ति को खारिज करते हुए कहा कि भारत का आवेदन पूरी तरह स्वीकार करने योग्य है। इसके उलट राय रखने वाले इकलौते जज पाकिस्तान के तसाद्दुक हुसैन जिलानी थे जो एडहॉक जज हैं।ICJ के प्रेजिडेंट यूसुफ, वाइस-प्रेजिडेंट जु और जज टोमका, अब्राहम, बेनौना, कैन्काडो त्रिनिदाद, डोनोघू, गाजा, सेबुटिंडे, भंडारी, रॉबिंसन, क्रॉफोर्ड, गेवोर्जियन, सलाम और इवास्वाएडहॉक जज तसाद्दुक हुसैन जिलानीICJ ने 15-1 से फैसला सुनाया कि पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव को वियना कन्वेंशन के आर्टिकल 36 (1-b) के तहत कंसुलर ऐक्सेस के जो अधिकार मिले थे, उसके बारे में उन्हें जानकारी न देकर शर्तों का उल्लंघन किया है। यहां भी इसके खिलाफ राय रखने वाले इकलौते जज पाकिस्तान के जिलानी ही थे।ICJ ने 15-1 के बहुमत से फैसला सुनाया कि पाकिस्तान ने भारत को जाधव तक कंसुलर ऐक्सेस न देकर वियना कन्वेंशन का उल्लंघन किया। कोर्ट ने फैसले में कहा कि वियना कन्वेंशन के आर्टिकल 36, पैराग्राफ 1 (b) के तहत भारत को अपने नागरिक तक पहुंच और संबंधित शख्स की मदद करने का अधिकार है। ऐसा न करके पाकिस्तान ने उसके अधिकारों का उल्लंघन किया है। यहां भी विरोध में राय रखने वाले इकलौते जज पाकिस्तान के जिलानी ही रहे।इस बिंदु पर ICJ ने 15-1 के बहुमत से अपने फैसले में कहा कि पाकिस्तान ने भारत को जाधव से बातचीत करने, उन तक पहुंच होने, हिरासत में उनसे मिलने और उनके लिए कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के अधिकारों से वंचित किया। यह वियना कन्वेंशन के आर्टिकल 36, पैराग्राफ 1 (a) और (c) का उल्लंघन है।ICJ ने 15-1 के बहुमत से कहा कि पाकिस्तान को वियना कन्वेंशन के तहत कुलभूषण जाधव को बिना किसी विलंब के उन्हें मिले अधिकारों के बारे में बताना चाहिए था। पाकिस्तान को भारतीय दूतावास के किसी अधिकारी को जाधव तक पहुंच उपलब्ध कराना चाहिए था क्योंकि यह जाधव का अधिकार था।ICJ ने 15-1 के बहुमत से पाकिस्तान को आदेश दिया कि वह जाधव के दोष और उन्हें सुनाई गई मौत की सजा की समीक्षा करे और उस पर पुनर्विचार करे। ICJ ने आदेश दिया कि पाकिस्तान इस दौरान यह सुनिश्चित करे कि जाधव और भारत को वियना कन्वेंशन के हिसाब से सारे अधिकार मिलें।ICJ ने 15-1 के बहुमत से यह आदेश दिया कि सजा की समीक्षा तक जाधव की फांसी पर लगी रोक जारी रहेगी। इसका मतलब है कि जाधव अभी पाकिस्तान की हिरासत में ही रहेंगे। अब पाकिस्तान को जाधव तक भारत को कंसुलर ऐक्सेस मुहैया करानी होगी। इस तरह भारत के अधिकारी जाधव से मिल सकेंगे और केस में उन्हें कानूनी मदद देते हुए उनका प्रतिनिधित्व कर सकेंगे।
Source: Navbharat Times July 17, 2019 15:38 UTC