bhajanpura accident: भजनपुरा हादसा: 26 जनवरी के लिए मंगाई थी, दोबारा न पहन सका फौजी की वर्दी - bhajanpura families suffer shock of deaths of kids in coaching center mishap - News Summed Up

bhajanpura accident: भजनपुरा हादसा: 26 जनवरी के लिए मंगाई थी, दोबारा न पहन सका फौजी की वर्दी - bhajanpura families suffer shock of deaths of kids in coaching center mishap


भजनपुरा हादसाहाइलाइट्स दिल्ली के भजनपुरा में कोचिंग सेंटर हादसामासूमों के परिवारों में मातम का माहौलघरों के चिराग बुझे, इलाके में पसरा सन्नाटायाद कर रहे घरवाले, कम नहीं होता दर्दकोचिंग सेंटर में हुए हादसे से इलाके के कई घरों में मातम छा गया है। इलाके की गली में शायद ही कोई ऐसा घर हो, जहां से रोने की आवाज सुनाई ना दे। हर तरफ असहाय और निराशा से भरे हुए मां बाप के चेहरे नजर आ रहे हैं। हादसे का मंजर इतना दिल दहला देने वाला था कि मां-बाप तो छोड़िए आस-पड़ोस और रिश्तेदारों की आंखों से आंसू नहीं रुक रहे।पिता रमेश प्रकाश और मां लक्ष्मी बेटे कृष्णा की मौत से गहरे सदमे में हैं। पिता ने बताया कि इस हादसे ने जहां उनके एक बेटे को उनसे छीन लिया है, वहीं उनके दोनों बच्चे गंभीर रूप से चोटिल हो गए हैं। बड़े बेटे नितिन को पूरे शरीर में काफी चोट आई है, जबकि बेटी उमा का एक पैर फ्रैक्चर हो चुका है। सुभाष विहार की गली नंबर 2 में यह परिवार किराए के मकान में रहता है। पिता फैक्ट्री में सिलाई का काम करते हैं। उनका कहना है कि इस हादसे ने उनके परिवार की नींव को हिला कर रख दिया है।विक्रांत और पूनम त्यागी को अभी तक विश्वास नहीं हो रहा है कि उनकी बेटी कीर्ति अब उनके बीच नहीं है। कीर्ति की मम्मी रो-रो कर बस यही बात दोहरा रही हैं कि कहीं से उनकी बेटी को ला दो। यह परिवार सुभाष विहार की गली नंबर 17 में रहता है। कीर्ति के पिता कपड़े की दुकान में काम करते हैं। कृति की मौत से उनके दादाजी काफी आहत हैं। विक्रांत के भाई के भी दो बच्चे इसी कोचिंग सेंटर में पढ़ते थे।6 साल के फरहान जब शाम घर से निकले तो उन्होंने घर में कहा कि पापा आज ट्यूशन जाने का मन नहीं है। फरहान की ये बातें याद करके आज फरहान के पिता रोते हैं कि काश, अगर उन्होंने अपनी बेटे की इस बात को मान लिया होता तो आज वह आंखों के सामने होता। उन्होंने बताया कि 3:45 पर उनके दोनों बच्चे ट्यूशन के लिए निकले थे। लेकिन कुछ ही समय बाद उनकी बेटी का फोन आया कि पापा ट्यूशन की छत गिर गई है और इतना सुनते ही आरिफ कोचिंग सेंटर की तरफ भागे और बेटे को मलबे के ढेर के बीच से उठाया।यह आखिरी शब्द थे दीशू के, जब वह ट्यूशन जाने के लिए घर से निकले थे। अभिनव भारती स्कूल में पढ़नेवाले दीशू ने 26 जनवरी के प्रोग्राम को ध्यान में रखते हुए अपने मम्मी-पापा से फौजी वाली ड्रेस लाने की मांग की थी। पिता महिपाल सिंह जब ड्रेस लाए, दीशू इतना खुश हो गया कि उसने बिल्कुल भी देरी ना करते हुए वह ड्रेस पहनी। उसे क्या पता था कि फिर लौटकर कभी भी उस ड्रेस को नहीं पहन पाएगा।


Source: Navbharat Times January 26, 2020 23:03 UTC



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