देश के टॉप टेलिविजन नेटवर्क्स ने टेलिकॉम रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) का नया टैरिफ ऑर्डर लागू होने पर DTH और केबल ऑपरेटर्स के बेसिक पैक में अपने चैनल नहीं देने का संयुक्त फैसला किया है। उनका यह कदम कार्टेलाइजेशन यानी साठगांठ लगती है। यह उन दर्शकों के लिए झटका होगा जो अगले वर्ष की शुरुआत से अपने मासिक DTH या केबल बिल में बड़ी कमी की उम्मीद कर रहे थे। अब TRAI की ओर से बेसिक पैक के लिए तय किए गए 130 रुपये (और टैक्स) के प्राइस में उन्हें अपने पसंदीदा चैनल नहीं दिखेंगे।सूत्रों ने इकनॉमिक टाइम्स को बताया कि स्टार इंडिया, जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज (ZEE), सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया, वायकॉम18 और टीवी18 जैसे लोकप्रिय टेलिविजन नेटवर्क्स ने बेसिक पैक में अपने चैनल नहीं रखने पर सहमति जताई है।एक प्रमुख टेलिविजन नेटवर्क के सूत्र ने कहा, 'हम सबने 2 कारणों से बेसिक पैक में अपने चैनल ऑफर नहीं करने का फैसला किया है। पहला, इन पैक का हिस्सा बनने के लिए भारी भीड़ होगी और डिस्ट्रिब्यूशन प्लेटफॉर्म (DTH और केबल) बहुत अधिक कैरिज और प्लेसमेंट फीस मांगेंगे। दूसरा, दर्शकों को अगर कम प्राइस पर पसंद का एंटरटेनमेंट मिलेगा तो वह अधिक प्राइस वाले पैक नहीं लेना चाहेंगे।'एक अन्य ब्रॉडकास्ट कंपनी के सीनियर एग्जिक्यूटिव ने कहा कि इसके जरिए वे सब्सक्राइबर्स के लिए बेसिक पैक का आकर्षण कम करना चाहते हैं। उन्होंने बताया, 'टीवी इंडस्ट्री लंबे समय से कम ARPU (एवरेज रेवेन्यू पर यूजर) से जूझ रही है और हमने फ्री डिश के साथ की गई गलती नहीं दोहराने का फैसला किया है। टॉप ब्रॉडकास्टर्स के चैनल नहीं होने से सब्सक्राइबर्स को चैनलों के लिए अधिक प्राइस देने पर मजबूर होना पड़ेगा।'TRAI ने सुप्रीम कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद 4 मई को टेलिकम्यूनिकेशन (ब्रॉडकास्टिंग ऐंड केबल) सर्विसेज टैरिफ ऑर्डर, 2017 को नोटिफाई किया था। स्टार इंडिया ने इसे चुनौती दी है और सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में सुनवाई चल रही है। अन्य ब्रॉडकास्टर्स ने टैरिफ ऑर्डर का पालन करते हुए अपने रेफरेंस इंटरकनेक्ट ऑफर (RIO) दस्तावेजों की घोषणा कर चैनलों के मैक्सिमम रिटेल प्राइस और बुके रेट्स की जानकारी दी है। अगर कोर्ट TRAI के पक्ष में आदेश देता है तो ब्रॉडकास्टर्स को 27 दिसंबर तक DTH और केबल ऑपरेटर्स के साथ इंटरकनेक्ट अग्रीमेंट साइन करना होगा और नए टैरिफ ऑर्डर का पालन करना होगा। इस टैरिफ ऑर्डर में कंज्यूमर्स को पहले 100 चैनल 130 रुपये में उपलब्ध होंगे। कानूनी जानकारों का कहना है कि ब्रॉडकास्टर्स के इस कदम का साठगांठ करार देना मुश्किल होगा क्योंकि टीवी नेटवर्क्स ने वही रेट ऑफर किया है, जिसका निर्देश दिया गया था।
Source: Navbharat Times September 26, 2018 03:11 UTC