सांकेतिक तस्वीरहाइलाइट्स मुसीबत के वक्त इंटरनेट से यूं ही फोन नंबर निकालकर मदद मांगना बेहद खतरनाक हो सकता हैगाजियाबद के लालकुआं में कुछ समय पहले एक सांड खाली प्लॉट पर बनी चौखट में फंस गया थाइंटरनेट पर सर्च कर मदद के लिए फोन किया, बैंक अकाउंट से चार बार में 1 लाख 2 हजार कट गएमुसीबत के वक्त इंटरनेट से यूं ही फोन नंबर निकालकर मदद मांगना किस कदर खतरनाक हो सकता है, इसका ताजा उदाहरण यूपी के गाजियाबाद में दिखाई दिया। यहां लालकुआं इलाके में कुछ समय पहले एक सांड खाली प्लॉट पर बनी चौखट में फंस गया था। सामने शंकर विहार कॉलोनी में रहने वाले वकील पुष्पेंद्र सिंह ने देखा तो मदद के लिए रेस्क्यू टीम को बुलाना चाहा।उनके पास फोन नंबर नहीं था, तो इंटरनेट पर सर्च किया। वहां से उन्हें एक फोन नंबर मिला। उस पर बात की तो दूसरी तरफ से कहा गया कि हां हम मदद कर सकते हैं, लेकिन 10 रुपये की पर्ची कटवानी होगी और ऑनलाइन एक फॉर्म भरना होगा। वकील साहब ने मोबाइल नंबर समेत कुछ डीटेल्स फॉर्म में भर दीं। उसके बाद बताया गया कि नगर निगम की गाड़ी जल्द मौके पर पहुंच जाएगी। गाड़ी तो आई नहीं, उलटे बैंक अकाउंट से चार बार में 1 लाख 2 हजार रुपये कट गए।पुष्पेंद्र का आरोप है कि पिछले साल 31 दिसंबर की इस घटना के बारे में मुकदमा दर्ज कराने के लिए उन्होंने 22 दिनों तक कविनगर थाने और साइबर सेल के कई चक्कर काटे। बाद में, 22 जनवरी को एसएसपी से मुलाकात के बाद उनकी रिपोर्ट दर्ज की गई। पुलिस के अनुसार, प्राथमिक जांच में लग रहा है कि बदमाशों ने ऑनलाइन लिंक भेजकर इनका फोन हैक कर लिया था और गोपनीय डीटेल्स हासिल करके ठगी को अंजाम दिया।साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि इंटरनेट से हेल्पलाइन या अन्य कोई नंबर लें तो उसकी असलियत अच्छे से परख लें। अनजानी साइटों से कुछ भी डाउनलोड न करें। वॉट्सऐप या एसएमएस पर आए लिंक को तब तक न खोलें, जब तक पूरा भरोसा न हो। अपनी आईडी और बैंक खाते की डीटेल्स ऐसे ही शेयर न करें। बैंक या वॉलेट से आया OTP किसी को न बताएं, चाहे वह कितने भी तर्क क्यों न दे।
Source: Navbharat Times January 26, 2020 01:07 UTC