धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हम जब भी नई कार लेते हैं, तो सबसे पहले अपने ईष्ट देव की छोटी सी मूर्ति डैशबोर्ड पर स्थापित करते हैं। माना जाता है कि इससे सफर सुरक्षित रहता है और ईश्वर का आशीर्वाद बना रहता है। लेकिन, वास्तु शास्त्र की मानें तो कार एक छोटा और गतिशील स्थान है। यहां मूर्तियों को रखने के नियम घर के मंदिर से काफी अलग होते हैं। अनजाने में की गई छोटी सी गलती आपकी एकाग्रता और सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है।मूर्तियों का आकार और चुनाव वास्तु शास्त्र के अनुसार, कार में कभी भी बहुत बड़े आकार की मूर्ति नहीं रखनी चाहिए। डैशबोर्ड पर रखी मूर्ति इतनी बड़ी न हो कि वह ड्राइवर के 'व्यू' (रास्ते की दृष्टि) में बाधा डाले। धार्मिक मान्यताओं के आधार पर कार में भगवान की टूटी हुई या खंडित मूर्ति रखना अत्यंत अशुभ होता है। अगर मूर्ति का रंग फीका पड़ गया है या वह कहीं से चटक गई है, तो उसे तुरंत हटाकर किसी पवित्र स्थान पर विसर्जित कर देना चाहिए।कौन सी मूर्तियाँ रखने से बचें? वास्तु के मुताबिक, कार में कभी भी उग्र रूप वाली मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए। जैसे, मां काली का क्रोधित स्वरूप या युद्ध मुद्रा वाली तस्वीरें कार की ऊर्जा को अशांत कर सकती हैं। कार एक ऐसी जगह है जहां शांति और संतुलन की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, इसलिए यहां सौम्य और मुस्कुराते हुए चेहरों वाली मूर्तियां ही लगानी चाहिए।
Source: Dainik Jagran February 06, 2026 12:13 UTC