स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिव सचिन कुर्वे ने निर्देश दिए हैं कि अप्रैल माह से राज्य में घर पर प्रसव (होम डिलीवरी) किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा।उत्तराखंड सरकार ने मातृ एवं नवजात मृत्यु दर कम करने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिव सचिन कुर्वे ने निर्देश दिए हैं कि अप्रैल माह से राज्य में घर पर प्रसव (होम डिलीवरी) किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने अधिक. गुरुवार को देहरादून और चम्पावत जनपदों की स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा बैठक के दौरान यह निर्देश जारी किए गए। सचिव कुर्वे ने पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक चुनौतियों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में सड़क संपर्क की समस्या है, वहां गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने के लिए हेली सेवाओं का प्रभावी उपयोग किया जाए।सचिव ने जोर दिया कि स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी है कि समय से पूर्व माइक्रो-प्लानिंग कर गर्भवती महिलाओं का सुरक्षित संस्थागत प्रसव सुनिश्चित किया जाए। इसके तहत, प्रत्येक गर्भवती महिला की अपेक्षित प्रसव तिथि (EDD) के आधार पर माइक्रो-ट्रैकिंग की जाएगी।ANM और आशा कार्यकर्ताओं को दैनिक समन्वय के माध्यम से 'अंतिम मील' तक फॉलो-अप सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMO) को उन क्षेत्रों का स्वयं दौरा करने को कहा गया है जहां होम डिलीवरी के मामले अधिक सामने आते हैं।बैठक में कई अन्य महत्वपूर्ण निर्देश भी दिए गए। इनमें पहली तिमाही में पंजीकरण और न्यूनतम चार प्रसव पूर्व जांच (ANC) अनिवार्य करना शामिल है। हाई रिस्क प्रेगनेंसी (HRP) की पहचान में किसी भी लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।टीबी उन्मूलन के लिए 100 दिवसीय अभियान के तहत ओपीडी में आने वाले 10% मरीजों की टीबी स्क्रीनिंग अनिवार्य की गई है। इसके अतिरिक्त, अवैध लिंग निर्धारण रोकने के लिए निजी केंद्रों पर डिकॉय ऑपरेशन और सख्त निरीक्षण के निर्देश भी दिए गए हैं। इस समीक्षा बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की निदेशक डॉ. रश्मि पंत के साथ-साथ दोनों जनपदों के मुख्य चिकित्सा अधिकारी और अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
Source: Dainik Bhaskar April 09, 2026 16:10 UTC