उत्तराखंड का बजट सत्र 9 से 13 मार्च तक गैरसैंण (भराड़ीसैंण) में आयोजित होने जा रहा है, जिसे लेकर अब प्रदेश की सियासत गरमा गई है। विपक्ष ने सत्र की छोटी अवधि पर कड़ा एतराज जताते हुए इसे केवल एक खानापूर्ति करार दिया है। विपक्षी दलों का तर्क है कि मात्र. विपक्ष की मुख्य रणनीति इस बार सोमवार के दिन को सत्र के बीच में शामिल कराने की है। दरअसल, संसदीय परंपरा के अनुसार सोमवार का दिन मुख्यमंत्री के विभागों से संबंधित सवाल-जवाब के लिए महत्वपूर्ण होता है। विपक्ष चाहता है कि कार्यसूची में सोमवार का दिन इस तरह आए जिससे वे सीधे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को घेर सकें और उनसे प्रदेश की ज्वलंत समस्याओं पर जवाब मांग सकें। सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ते इस गतिरोध ने आगामी सत्र के काफी हंगामेदार होने के संकेत दे दिए हैं।मुख्यमंत्री से सीधे सवाल के लिए सोमवार का दिन है जरूरी-लखपत बुटोलाबद्रीनाथ से कांग्रेस विधायक लखपत बुटोला ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष लगातार सदन को कम से कम 21 दिन चलाने की मांग कर रहा है, ताकि प्रदेश के कई अहम मुद्दों पर चर्चा की जा सके। उन्होंने विशेष रूप से सोमवार के दिन के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह दिन मुख्यमंत्री के विभागों के प्रश्नकाल का होता है, लेकिन सरकार ने सत्र की शुरुआत ही कुछ इस तरह रखी है कि सोमवार होते हुए भी वो पूरा दिन राज्यपाल के अभिभाषण से समाप्त हो जाएगा और सरकार भी चाहती है चर्चा से बचा जा जाए इसीलिए सरकार ने सत्र की अवधि को कम रखा है। साथ ही उन्होंने कहा सत्र को चलाने के सम्बन्ध में हमें पड़ोसी राज्य हिमाचल से सिखने की जरुरत है। बुटोला ने आरोप लगाया कि पिछली बार भी 3 दिन के सत्र में मात्र 4 घंटे काम हुआ और सरकार अनुपूरक बजट पास कराकर भाग गई। उन्होंने डेमोग्राफिक चेंज और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर चर्चा की चुनौती देते हुए कहा कि अगर सरकार पहले ही ऐसे मुद्दों पर चर्चा कराती तो आज प्रदेश क़ानून व्यवस्था बेहतर होती।नेता प्रतिपक्ष की मौजूदगी में तय होती है सत्र की अवधि-विनोद चमोलीदूसरी तरफ भाजपा विधायक विनोद चमोली ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सत्र की अवधि 'कार्य मंत्रणा समिति' द्वारा तय किए गए टास्क (कार्य) पर निर्भर करती है और ये टास्क नेता प्रतिपक्ष की मौजूदगी में तय किया जाता है इसलिए कांग्रेस केवल गैरसैंण के नाम का इस्तेमाल कर रही है इसलिए दिखाने के लिए विरोध किया जा रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस हमेशा गैरसैंण सत्र को लेकर सवाल उठाती है, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उनके विधायक वापस आने की जल्दी में रहते हैं। चमोली ने कहा कि अगर कांग्रेस को लगता है कि वहां ज्यादा दिन रुकने से भला होगा, तो उनके विधायक एक महीना वहां क्यों नहीं रुकते। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस ने अब अपने एजेंडे से गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने का मुद्दा ही हटा दिया है और वे केवल जनता को छलने का काम कर रहे हैं।
Source: Dainik Bhaskar February 18, 2026 21:40 UTC