US-India trade war: ट्रंप को भारत को व्यापार युद्ध में घसीटने की भूल नहीं करनी चाहिए, जानें क्यों - this is why trump should avoid dragging india into trade war - News Summed Up

US-India trade war: ट्रंप को भारत को व्यापार युद्ध में घसीटने की भूल नहीं करनी चाहिए, जानें क्यों - this is why trump should avoid dragging india into trade war


अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने चीन के खिलाफ ट्रेड वॉर छेड़ रखा है और अमेरिका फर्स्ट पॉलिसी को पोषित करने के क्रम में वह भारत को भी बख्शने के मूड में नहीं दिख रहे हैं। ट्रंप भारत को ' टैरिफ किंग ' का तमगा भी दे चुके हैं। उनकी नजर इस आंकड़े पर है कि व्यापारिक रिश्ते में भारत 24.3 अरब डॉलर के ट्रेड सरप्लस के साथ अमेरिका पर भारी पड़ रहा है। लेकिन, क्या भारत के प्रति ट्रंप का यह तंग नजरिया अमेरिका के लिए लाभदायक साबित होगा?ब्लूमबर्ग का आर्टिकल कहता है कि भारत ने उत्तर-उपनिवेवादी मानसिकता का पूरी तरह परित्याग नहीं किया है। उसे अपनी स्वायत्तता का सिद्दत से संरक्षण करता है, इसलिए अब भी वैश्विक पटल पर खुद को गुटनिरपेक्ष राष्ट्र के रूप में ही पेश करना चाहता है। यही वजह है कि हाल के वर्षों में बेहद करीबी रणनीतिक साझेदारी बनने के बावजूद भारत की दिलचस्पी अमेरिका के साथ औपचारिक गठबंधन करने की कतई नहीं होगी।अमेरिकी सरकारों ने भारत की आकंक्षाओं, अपेक्षाओं और नीतियों का सम्मान करते हुए सहयोग की भावना का निरंतर इजहार किया है। अमेरिकी सरकारें एक के बाद एक, लगातार अनुकूल फैसले लेकर प्रभावी तौर पर ऐलान सा करती रहीं कि भारत की प्रगति अमेरिका के हित में है। साल 2005 में भारत के साथ सिविल न्यूक्लियर डील को अंजाम देना इसका एक ऐसा ही उदाहरण है।लेकिन, अगर ट्रंप प्रशासन ने न केवल भारत से आयातित वस्तुओं पर टैरिफ लगाना शुरू कर दिया, बल्कि उसे ईरान से कच्चा तेल खरीदने से भी रोक दिया। इतना ही नहीं, उसने अफगानिस्तान के विकास में भारत के महत्वपूर्ण योगदान को भी नजरअंदाज किया है।इन अमेरिकी गतिविधियों से कुछ भारतीयों के मन में अमेरिका पर विश्वास करने को लेकर दोबारा संदेह पैदा होने लगा है। अमेरिका को चाहिए कि वह दीर्घावधि के बड़े हितों को साधन के लिए छोटे-छोटे तात्कालिक हितों की चिंता नहीं करे। ट्रंप ऐडमिनिस्ट्रेशन को यह भी याद रखना चाहिए कि चमकदार अर्थव्यवस्था वाला भारत उसके लिए रणनीतिक मोर्चे पर भी बड़ा और महत्वपूर्ण साझेदार हो सकता है। लेकिन, उसने जिस तरह से भारत को जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेज (जीएसपी) लिस्ट से बाहर करने का ऐलान किया, उससे भारत में बनने वाली नई सरकार के सामने जवाब में अमेरिकी वस्तुओं पर टैरिफ बढ़ाने का फैसले लेने के अलावा कोई चारा नहीं बचेगा।इस तरह, भारत-अमेरिका के बीच अमेरिका और चीन जैसी स्थिति पैदा होने का खतरा बढ़ेगा। तब चीन को छोड़ भारत का रुख करने की अमेरिकी कंपनियों में पनप रही भावना कमजोर पड़ सकती है। ऐसा हुआ तो भारत को जरूरी मात्रा में विदेशी निवेश नहीं मिलेगा और तब एशिया में बड़ी भूमिका निभाने की उसकी मंशा को आघात पहुंच सकता है।दरअसल, भारत की व्यापारिक नीतियों का बड़ा हिस्सा चीन को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। अमेरिका की तरह भारत को भी चीन के साथ जबर्दस्त व्यापार घाटा उठाना पड़ रहा है। ऐसे में चीन को अपनी व्यापारिक नीति बदलने को मजबूर करने की अमेरिकी कोशिश का साथ देना भारत के लिए भी हितकर होगा।ब्लूमबर्ग के लेख में भारत और अमेरिका, दोनों के लिए कुछ सुझाव भी दिए गए हैं। लेख कहता है, 'ट्रंप प्रशासन को चाहिए कि वह नई सरकार को कुछ महीने का वक्त दे ताकि वह कुछ गंभीर मसौदे तैयार कर इस दिशा में ठोस कदम उठा सके। जब अमेरिका, चीन के खिलाफ व्यापारिक संघर्ष में आगे बढ़ने का मन बना चुका है, तब भारत को भी इसका लाभ उठाते हुए कुछ ऐसा करना चाहिए जिससे उसे लेकर ट्रंप प्रशासन को मिली गलत सलाह को भविष्य में ताकत नहीं मिल सके।'


Source: Navbharat Times May 17, 2019 14:42 UTC



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