Hindi NewsLocalHaryanaGurugramThree Year Rape Case Supream Court Scold Police Gurugramरेप पीड़ित बच्ची को थाने बुलाने पर सुप्रीम कोर्ट नाराज: गुरुग्राम पुलिस से कहा- यह शॉकिंग, पुलिस पीड़ित के घर क्यों नहीं जा सकती, राजा हो? गुरुग्राम 5 घंटे पहलेकॉपी लिंकसुप्रीम कोर्ट ने तीन साल की बच्ची से रेप के मामले में असंवेदनशील रवैये के लिए हरियाणा पुलिस और बाल कल्याण समिति को जमकर फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हरियाणा पुलिस द्वारा पीड़ित से मिलने के बजाय उसे थाने बुलाना शर्मनाक है।कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा- पुलिस अफसरों को देखिए, उनकी पोजिशन देखिए। पुलिस स्टेशन में DCP, ASP रहते हैं। इस अपराध में आपकी यही समझ है तो फिर कानून किसे कहेंगे? यह शॉकिंग है… पुलिस पीड़ित के घर क्यों नहीं जा सकती? क्या वे राजा हैं? सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच के लिए हरियाणा कैडर की महिला आईपीएस अधिकारियों सहित तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। साथ ही हरियाणा सरकार को विशेष जांच टीम गठित करने का निर्देश दिया। इसके अलावा गुरुग्राम पुलिस को गुरुवार तक मामले के रिकॉर्ड सौंपने के भी आदेश दिए हैं।गुरुग्राम में बच्ची से यौन उत्पीड़न का मामला फरवरी 2026 में सामने आया था।पहले जानिए बच्ची से रेप का पूरा मामला…चार फरवरी को पिता ने दी थी शिकायत: 4 फरवरी 2026 को एक व्यक्ति ने गुरुग्राम के थाना सेक्टर-53 में शिकायत दर्ज करवाई थी। जिसमें कहा था- उनकी सोसाइटी की 2 मेड और एक व्यक्ति ने दिसंबर 2025-जनवरी 2026 में उनकी 3 वर्षीय बेटी के साथ अश्लील हरकत और यौन शोषण किया।4 फरवरी 2026 को एक व्यक्ति ने गुरुग्राम के थाना सेक्टर-53 में शिकायत दर्ज करवाई थी। जिसमें कहा था- उनकी सोसाइटी की 2 मेड और एक व्यक्ति ने दिसंबर 2025-जनवरी 2026 में उनकी 3 वर्षीय बेटी के साथ अश्लील हरकत और यौन शोषण किया। पुलिस ने केस दर्ज किया, जांच में लापरवाही: शिकायत पर पुलिस ने POCSO एक्ट की धारा 6, धारा 17 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 65(2) (12 साल से कम उम्र की बच्ची से बलात्कार) के तहत केस दर्ज किया। मगर, शुरुआत से ही पुलिस ने मामले में लापरवाही दिखाई। शुरु में दो महिलाओं को डिटेन किया गया, लेकिन तुरंत गिरफ्तारी नहीं हुई। पुरुष आरोपी का नाम भी शुरुआत में FIR में नहीं था।शिकायत पर पुलिस ने POCSO एक्ट की धारा 6, धारा 17 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 65(2) (12 साल से कम उम्र की बच्ची से बलात्कार) के तहत केस दर्ज किया। मगर, शुरुआत से ही पुलिस ने मामले में लापरवाही दिखाई। शुरु में दो महिलाओं को डिटेन किया गया, लेकिन तुरंत गिरफ्तारी नहीं हुई। पुरुष आरोपी का नाम भी शुरुआत में FIR में नहीं था। मामला सीडब्ल्यूसी और सुप्रीम कोर्ट पहुंचा: इसके बाद मामले को बाल कल्याण समिति (CWC) को रेफर किया गया। माता-पिता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें CBI या SIT जांच की मांग की गई। परिवार का आरोप था कि हरियाणा पुलिस की जांच निष्पक्ष और संतोषजनक नहीं है। पुलिस ने CCTV फुटेज नहीं लिया, सबूत इकट्ठा नहीं किए और आरोपियों की गिरफ्तारी में देरी भी की।इसके बाद मामले को बाल कल्याण समिति (CWC) को रेफर किया गया। माता-पिता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें CBI या SIT जांच की मांग की गई। परिवार का आरोप था कि हरियाणा पुलिस की जांच निष्पक्ष और संतोषजनक नहीं है। पुलिस ने CCTV फुटेज नहीं लिया, सबूत इकट्ठा नहीं किए और आरोपियों की गिरफ्तारी में देरी भी की। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, तीन आरोपी अरेस्ट किए: सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर होने के बाद पुलिस ने 22 मार्च 2026 को तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें यूपी और पश्चिम बंगाल की रहने वाली दो महिलाएं और एक पुरुष शामिल है। पुलिस ने पुरुष को पश्चिम बंगाल की रहने वाली महिला का पति बताया।सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम पुलिस कमिश्नर सभी रिकॉर्ड लेकर पेश होने के लिए कहा है।अब जानिए सुप्रीम कोर्ट ने क्यों लगाई हरियाणा पुलिस को फटकार…वकील रोहतगी ने उठाया मामला: वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने बीते शुक्रवार को सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत की पीठ के समक्ष मामले का तत्काल उल्लेख किया और आर्टिकल 32 के तहत दायर याचिका पर तुरंत सुनवाई की मांग की। रोहतगी ने अदालत को बताया कि पीड़ित बच्ची को पुलिस स्टेशन, CWC, मेडिकल परीक्षण आदि के लिए बार-बार ले जाया गया, जो कानून के मुताबिक नहीं था।वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने बीते शुक्रवार को सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत की पीठ के समक्ष मामले का तत्काल उल्लेख किया और आर्टिकल 32 के तहत दायर याचिका पर तुरंत सुनवाई की मांग की। रोहतगी ने अदालत को बताया कि पीड़ित बच्ची को पुलिस स्टेशन, CWC, मेडिकल परीक्षण आदि के लिए बार-बार ले जाया गया, जो कानून के मुताबिक नहीं था। सुप्रीम कोर्ट ने की सुनवाई, लगाई फटकार: सोमवार को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सीजेआई ने एक मजिस्ट्रेट द्वारा बंद कमरे में आरोपी के सामने 30 मिनट तक बच्ची का बयान लेने पर सख्त टिप्पणी की। कहा- "यह शॉकिंग और इंसेंसिटिव है"।सोमवार को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सीजेआई ने एक मजिस्ट्रेट द्वारा बंद कमरे में आरोपी के सामने 30 मिनट तक बच्ची का बयान लेने पर सख्त टिप्पणी की। कहा- "यह शॉकिंग और इंसेंसिटिव है"। हरियाणा सरकार, DGP को नोटिस जारी किया: इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में हरियाणा सरकार और DGP को नोटिस जारी किया। गुरुग्राम पुलिस कमिश्नर और जांच अधिकारी को 25 मार्च 2026 को सभी रिकॉर्ड लेकर पेश होने को कहा। इसके अलावा मामले की जांच के लिए हरियाणा कैडर की महिला आईपीएस अधिकारियों सहित तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम का गठन किया है।इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में हरियाणा सरकार और DGP को नोटिस जारी किया। गुरुग्राम पुलिस कमिश्नर और जांच अधिकारी को 25 मार्च 2026 को सभी रिकॉर्ड लेकर पेश होने को कहा। इसके अलावा मामले की जांच के लिए हरियाणा कैडर की महिला आईपीएस अधिक
Source: Dainik Bhaskar March 25, 2026 15:19 UTC