Tax on Gold Investments: सोने में 4 तरीकों से लगा सकते हैं पैसा, लेकिन पहले जानें कैसे लगता है टैक्स - News Summed Up

Tax on Gold Investments: सोने में 4 तरीकों से लगा सकते हैं पैसा, लेकिन पहले जानें कैसे लगता है टैक्स


​फिजिकल गोल्ड सोने में निवेश का सबसे आम और सबसे ज्यादा पॉपुलर तरीका गोल्ड ज्वैलरी, बार या सिक्के हैं। फिजिकल गोल्ड की खरीद पर 3 फीसदी जीएसटी देय है। अब बात करते हैं फिजिकल गोल्ड की बिक्री पर टैक्स की। ग्राहक द्वारा फिजिकल गोल्ड बेचने पर टैक्स देनदारी इस बात पर निर्भर करती है कि आपने कितने समय तक इन्हें अपने पास रखा है। अगर गोल्ड को खरीदी की तारीख से तीन साल के भीतर बेचा जाता है तो इससे हुए किसी भी फायदे को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन माना जाएगा और इसे आपकी सालाना इनकम में जोड़ते हुए एप्लिकेबल इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स की गणना की जाएगी। इसके उलट अगर आप तीन साल के बाद गोल्ड बेचने का फैसला करते हैं तो इससे प्राप्त हुई धनराशि को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन माना जाएगा और इस पर 20 फीसदी की टैक्स देनदारी बनेगी। साथ ही इंडेक्सेशन बेनिफिट्स क साथ 4 फीसदी सेस और सरचार्ज भी लगेगा।​गोल्ड म्यूचुअल फंड्स, गोल्ड ETF गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) आपकी कैपिटल को फिजिकल गोल्ड में निवेश करता है और यह गोल्ड की प्राइस के हिसाब से घटता-बढ़ता रहता है। गोल्ड म्यूचुअल फंड्स की बात करें तो यह गोल्ड ईटीएफ में निवेश करता है। गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड म्यूचुअल फंड्स पर फिजिकल गोल्ड की तरह ही टैक्स देनदारी बनती है।​सॉवरेन गोल्ड बांड्स सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड गवर्मेंट सिक्योरिटीज हैं जिन्हें केंद्रीय बैंक आरबीआई, सरकार की ओर से जारी करता है। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर निवेशकों को हर साल 2.5 फीसदी का ब्याज हासिल होता है, जिसे करदाता की अन्य सोर्स से इनकम में जोड़ा जाता है। टैक्स भी इसी के आधार पर लगता है। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड खरीदे जाने के 8 साल पूरा होने के बाद ग्राहक को प्राप्त होने वाला रिटर्न पूरी तरह टैक्स फ्री है। लेकिन प्रीमैच्योरली एग्जिट करने पर बॉन्ड के रिटर्न पर अलग—अलग टैक्स रेट लागू हैं। आमतौर पर सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड का लॉक इन पीरियड 5 साल है। इस अवधि के पूरा होने के बाद और मैच्योरिटी पीरियड पूरा होने से पहले गोल्ड बॉन्ड की बिक्री से आने वाला रिटर्न लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स में रखा जाता है। इसके तहत 20 फीसदी टैक्स और 4 फीसदी सेस प्लस सरचार्ज लगता है।​डिजिटल गोल्ड सोने में निवेश के लिए डिजिटल गोल्ड का विकल्प भी रफ्तार पकड़ रहा है। कई बैंक, मोबाइल वॉलेट और ब्रोकरेज कंपनियों ने एमएमटीसी-पीएएमपी या सेफगोल्ड के साथ साझेदारी कर डिजिटल गोल्ड खरीदने की सुविधा देती हैं। डिजिटल गोल्ड की बिक्री के मामले में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर फिजिकल गोल्ड या गोल्ड म्यूचुअल फंड्स/गोल्ड ईटीएफ की तरह ही टैक्स देनदारी बनती है। यानी 20 फीसदी टैक्स प्लस सेस व सरचार्ज। लेकिन अगर डिजिटल गोल्ड 3 साल से कम अवधि तक ग्राहक के पास रहा तो इसकी बिक्री से रिटर्न पर सीधे तौर पर टैक्स नहीं लगता है।


Source: Navbharat Times February 25, 2021 05:58 UTC



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