भास्कर न्यूज | गुड़गांवअश्विन मास की पूर्णिमा 13 अक्टूबर को धूमधाम से मनाई जाएगी। इसी दिन सत्यदेव व्रत भी है और अगले दिन से कार्तिक स्नान भी आरंभ हो रहा है। शरद पूर्णिमा मनवांछित फल देने वाली माना जाता है। शहर के सुदर्शन माता मन्दिर, गुफा वाला मन्दिर, सिद्वेश्वर मन्दिर, घंटेश्वर मन्दिर, राम मन्दिर सेक्टर-4 स्थित श्रीकृष्ण मंदिर, श्रीराम मंदिर, विशाल राम श्याम मंदिर, प्रकाशपुरी आश्रम स्थित मंदिर में भी शरद पूर्णिमा पर भजन व कीर्तन होंगे। पंडित मुकेश शर्मा का कहना है कि पूरे वर्ष में केवल एक ही रात शरद पूर्णिमा के मौके पर ऐसी होती है, जब चंद्रमा 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है। उस रात उसका प्रभाव मानव जीवन को प्रभावित भी करता है। लोग इस दिन व्रत भी रखते हैं। उनका कहना है कि ये 16 कलाएं भगवान श्रीकृष्ण के महारास से जुड़ी हैं। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा भी इन 16 कलाओं का एक झरना अपनी चांदनी के रूप में पृथ्वी पर बिखरता है। इसीलिए चंद्रमा के पूर्ण होने पर पूर्णिमा की रात 12 बजे खीर बनाकर चांदनी रात में रख दी जाती है और अन्य चीजों का असर चंद्रमा की किरणों में होता है। पंडित जी का कहना है कि मान्यता तो यह भी है कि चंद्रमा की इन विशेष अवतरणी किरणों से अनेक शारीरिक बीमारियां तो दूर होती ही हैं साथ ही मानव जीवन के अनेक कष्ट भी शरद पूर्णिमा में उपवास रखने और चांदनी रात में खीर का भोजन करने से दूर हो जाते हैं। शरद पूर्णिमा का महत्व शास्त्र संगत है और इस दिन चंद्रमा की किरणों को अमृत वर्षा भी कहा जाता है। इसे शुभ मुहूर्त भी माना जाता है जिसमें लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है। कार्तिक स्नान भी शरद पूर्णिमा के अगले दिन शुरू हो जाता है। लोग पूरे माह व्रत रखकर पवित्र नदियों में स्नान कर अपने परिवार की खुशहाली के लिए कामनाएं भी करते हैं। शहर के मंदिर में भी शरद पूर्णिमा मनाने के लिए श्रद्धालुओं की तैयारियां तेजी से चल रही हैं।
Source: Dainik Bhaskar October 10, 2019 01:52 UTC