भास्कर न्यूज, पुणे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार शोध-आधारित चार वर्षीय स्नातक (ऑनर्स) पाठ्यक्रम लागू करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन इसके व्यावहारिक क्रियान्वयन को लेकर महाविद्यालयों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। विशेष रूप से चौथे वर्ष को कैसे लागू किया जाएगा और यह वर्ष अनुदानित होगा या स्व-वित्तपोषित, इस पर स्पष्टता का अभाव है।महाविद्यालय प्रशासन राज्य सरकार की मार्गदर्शक सूचनाओं का इंतजार कर रहा है। इस संबंध में महाराष्ट्र शैक्षणिक व संशोधन परिषद (महासार्क) द्वारा विस्तृत दिशा-निर्देश तैयार कर राज्य सरकार को सौंपने की प्रक्रिया जारी है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सरकार से निर्देश प्राप्त होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय की अर्थसंकल्पीय अधिसभा शुक्रवार और शनिवार को आयोजित की जा रही है। अधिसभा की कार्यसूची और प्रश्नोत्तर में चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम के चौथे वर्ष के क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठाए गए हैं।नई शिक्षा नीति में उच्च शिक्षा में शोध को प्रोत्साहन देने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके तहत स्नातक स्तर से ही विद्यार्थियों को शोध के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। नीति में ‘मल्टीपल एंट्री’ और ‘मल्टीपल एग्जिट’ जैसी सुविधाओं का प्रावधान है। तीन वर्ष पूरा करने वाले विद्यार्थियों को सामान्य स्नातक डिग्री, जबकि चौथे वर्ष में शोध करने वाले विद्यार्थियों को ऑनर्स डिग्री प्रदान की जाएगी।हालांकि, इस नई व्यवस्था के व्यावहारिक क्रियान्वयन को लेकर महाविद्यालयों में कई प्रश्न बने हुए हैं। अधिसभा सदस्य डॉ. अपूर्व हिरे और डॉ. बालासाहब सागडे ने विश्वविद्यालय की तैयारियों पर सवाल उठाए। वहीं, विश्वविद्यालय की प्रबंधन परिषद सदस्य डॉ. ज्योत्स्ना एकबोटे ने बताया कि 5 मार्च को मंत्रियों की अध्यक्षता में एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें ‘महासार्क’ को दिशा-निर्देश तैयार करने के निर्देश दिए गए।अधिसभा में सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय के ‘ऑफ-शोर कैंपस’ जरूरतमंद देशों में शुरू करने का प्रस्ताव भी रखा गया। अधिसभा सदस्य विनायक आंबेकर ने इसके लिए विश्वविद्यालय में एक स्वतंत्र विभाग स्थापित करने की सिफारिश की।इसके अलावा, स्वायत्त महाविद्यालयों की बढ़ती संख्या के साथ उनकी समस्याओं में भी वृद्धि हो रही है। अधिसभा सदस्य दादाभाऊ शिनलकर ने इन समस्याओं के समाधान के लिए समिति गठित करने और उसकी सिफारिशें लागू करने का सुझाव दिया।
Source: Dainik Bhaskar March 27, 2026 02:33 UTC