Pune City News: मनपा चुनाव में सियासी रणनीति का केंद्र बने 'लो-मार्जिन वार्ड' - News Summed Up

Pune City News: मनपा चुनाव में सियासी रणनीति का केंद्र बने 'लो-मार्जिन वार्ड'


भास्कर न्यूज, पिंपरी चिंचवड़। मनपा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, सियासी रणनीति का केंद्र 2017 में बेहद कम मतों से तय हुईं 23 सीटें बन गई हैं। इन "लो- मार्जिन वार्ड" की सीटों पर जीत-हार का अंतर एक हजार से भी कम रहा था। राजनीतिक दलों का आंकलन है कि अगर इन वार्डों में मतों का रुझान जरा भी बदला, तो मनपा की सत्ता की तस्वीर पूरी तरह पलट सकती है। यही वजह है कि भाजपा, राष्ट्रवादी कांग्रेस (दोनों गुट) और शिवसेना ने इन सीटों को ‘टर्निंग पॉइंट’ मानकर पूरी ताकत झोंक दी है।कौन कितना मजबूत था 2017 में? राजनीतिक दलों की रणनीति का केंद्र अब यही 23 सीटों वाले “लो-मार्जिन वार्ड” बन चुके हैं। 2017 के चुनाव में उनमें से राष्ट्रवादी कांग्रेस ने 10, भाजपा ने नौ और शिवसेना ने चार सीटों पर जीत दर्ज की थी। हालांकि, चुनाव बाद का राजनीतिक घटनाक्रम इस बार समीकरणों को और जटिल बना रहा है। कई विजयी नगरसेवक बाद में भाजपा में शामिल हो गए, वहीं कुछ भाजपा के मौजूदा चेहरों के टिकट इस बार कटे हैं। इन सबका सीधा असर मतदाताओं की सोच पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।भोसरी से लेकर निगड़ी तक सियासी कसौटीभोसरी विधानसभा क्षेत्र की 5-ड सीट पर राष्ट्रवादी के अजित गव्हाणे ने भाजपा विधायक महेश लांडगे के भाई सचिन लांडगे को महज 336 मतों से हराया था। वहीं 8-ड में राष्ट्रवादी के विक्रांत लांडे ने शिवसेना को 397 मतों से मात दी थी। 10-क में पूर्व महापौर मंगला कदम की जीत भी चर्चा में रही। हालांकि, बाद में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया, जबकि भाजपा की पराजित प्रत्याशी सुप्रिया चांदगुड़े इस बार बिनविरोध निर्वाचित हो चुकी हैं। कुछ वार्डों में जीत का अंतर बेहद मामूली रहा। 2-अ में भाजपा की अश्विनी जाधव सिर्फ 48 मतों से जीती थीं, जो अब राष्ट्रवादी (अजित पवार गुट) से मैदान में हैं। 14-ब और 14-क में सिर्फ 55-55 मतों का अंतर था। 23-अ में भाजपा की मनीषा पवार की जीत 97 मतों से हुई थी। ऐसे में इन सीटों पर प्रत्याशी बदलने या दल-बदल का असर निर्णायक साबित हो सकता है।पार्टी बदलने का भरोसा या नुकसान? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले पांच साल में हुए दल-बदल से मतदाता असमंजस में है। कई इलाकों में पुराने चेहरों को नजरअंदाज करने से बगावत और निर्दलीय उम्मीदवार समीकरण बिगाड़ सकते हैं। इसलिए इन 23 सीटों पर केवल पार्टी का नाम नहीं, बल्कि प्रत्याशी की व्यक्तिगत छवि, स्थानीय कामकाज और संगठन की पकड़ निर्णायक होगी। इन सीटों को लेकर सभी दल मान रहे हैं कि यहीं से सत्ता का रास्ता तय होगा। अगर भाजपा इन सीटों पर बढ़त बनाए रखती है, तो सत्ता में वापसी की उम्मीद मजबूत होगी। वहीं राष्ट्रवादी और शिवसेना के लिए यही सीटें मनपा पर कब्जे की कुंजी बन सकती हैं। कुल मिलाकर, पिंपरी चिंचवड़ मनपा का यह चुनाव बड़े भाषणों से ज्यादा, कुछ सौ वोटों की चाल पर टिका नजर आ रहा है।


Source: Dainik Bhaskar January 09, 2026 16:12 UTC



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