भास्कर न्यूज, पुणे। सत्तारूढ़ भाजपा ने जिस तरह से धनबल का प्रयोग कर लोकतंत्र के लिए घातक निर्विरोध चुनाव की प्रक्रिया शुरू की है, वह पूरी तरह गलत है। किसी पर दबाव बनाकर नामांकन वापस लेने के लिए मजबूर करना अनुचित है। जो उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं, वे जनभावना के आधार पर नहीं चुने गए। यदि कोई राजनीतिक दल का उम्मीदवार नामांकन वापस लेता है, तो एबी फॉर्म के साथ-साथ पार्टी प्रमुख के हस्ताक्षर वाला पत्र भी अनिवार्य होना चाहिए।यह आरोप राज्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मोहन जोशी ने लगाया। सोमवार को कांग्रेस भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मोहन जोशी ने पुणे मनपा चुनाव के लिए कांग्रेस और शिवसेना (ठाकरे गुट) के गठबंधन की आधिकारिक जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पुणे मनपा चुनाव के लिए कांग्रेस पार्टी के पास कुल 400 आवेदन आए थे, जिनमें से 165 सीटों पर हमारे पास सक्षम उम्मीदवार थे। हालांकि, समान विचारधारा वाले दलों को साथ लेकर मतों के विभाजन को रोकने का हमारा प्रयास अंत तक जारी रहा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस चुनाव में लगभग 100 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। गठबंधन के तहत शिवसेना (ठाकरे) 65 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। साथ ही, महादेव जानकर की रासपा और आम आदमी पार्टी को भी कुछ सीट दी गई हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और शिवसेना (ठाकरे) का संयुक्त प्रचार अभियान शुरू हो गया है। दोनों दलों के वरिष्ठ नेता प्रचार के लिए पुणे आएंगे। गठबंधन का चुनावी घोषणा पत्र 8 जनवरी को जारी किया जाएगा।सत्ताधारी गठबंधन पर प्रहारजोशी ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री अजित पवार पर तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री महायुति के रूप में चुनाव लड़ने की बात करते हैं, लेकिन पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में उनके साथ सत्ता के अन्य दो दल नहीं हैं। पालक मंत्री अजित पवार ने खुद भाजपा के भ्रष्टाचार की पोल खोली है, फिर भी वे राज्य में सत्ता में साथ हैं। भाजपा और उनके सहयोगी दलों के बीच केवल दिखावटी लड़ाई चल रही है। उन्होंने दोहराया कि भाजपा की विचारधारा का असली विरोधक केवल कांग्रेस पार्टी है, जो सभी जातियों और धर्मों को साथ लेकर चलती है। इस अवसर पर पूर्व नगरसेवक वीरेंद्र किराड़, पुणे शहर कांग्रेस उपाध्यक्ष अजीत दरेकर, महासचिव प्राची दुधाने और युवक कांग्रेस अध्यक्ष सौरभ अमराले उपस्थित थे।
Source: Dainik Bhaskar January 06, 2026 09:43 UTC