Pune City News: कड़े मुकाबले वाली हाई प्रोफाइल सीटों पर सबकी नजर - News Summed Up

Pune City News: कड़े मुकाबले वाली हाई प्रोफाइल सीटों पर सबकी नजर


भास्कर न्यूज, पिंपरी चिंचवड़। राज्य में सत्तारूढ़ दलों के बीच मनपा चुनाव में स्वबल पर लड़ने की प्रवृत्ति साफ नजर आ रही है। इसी कड़ी में पिंपरी चिंचवड़ मनपा चुनाव में भी भाजपा और उपमुख्यमंत्री अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस के बीच सीधी और निर्णायक टक्कर उभरकर सामने आई है। मनपा की 128 में से दो सीट पहले ही बिना विरोध घोषित हो चुकी हैं, जिससे भाजपा खेमे का उत्साह बढ़ा है। शेष 126 सीटों के लिए 15 जनवरी को मतदान होना है। उनमें से कड़े मुकाबले वाली सीटों पर सबकी नजरें गड़ी हैं। मतदान में अब कुछ ही दिन शेष रहने के कारण सभी राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है और शहर में प्रचार चरम पर पहुंच चुका है।उम्मीदवारों की संख्या और सियासी गणितचुनाव में भाजपा ने 120 उम्मीदवार, जबकि रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया ने कमल चिह्न पर पांच सीट पर उम्मीदवार उतारे हैं। अजित पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस सबसे अधिक 124 सीटों पर मैदान में है। वहीं, दोनों राष्ट्रवादी गुटों के तालमेल में शरदचंद्र पवार गुट 10 सीटों पर चुनाव लड़ रहा है। शिवसेना (एकनाथ शिंदे) के 57, शिवसेना (उद्धव बालासाहब ठाकरे) के 48, कांग्रेस के 45, आम आदमी पार्टी के 35, वंचित बहुजन आघाड़ी के 29, बहुजन समाज पार्टी के 15 और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के 13 उम्मीदवार चुनावी रणभूमि में हैं। इसके अलावा 166 निर्दलीय और बागी उम्मीदवार मैदान में होने से कई वार्डों में मुकाबला त्रिकोणीय या बहुकोणीय बन गया है।हाई-प्रोफाइल और टफ फाइट पर सबकी नजरमनपा चुनाव में इस बार मुकाबला केवल राजनीतिक दलों के बीच नहीं, बल्कि दिग्गज नेताओं के परिजनों, पुराने सहयोगियों और बागी उम्मीदवारों के बीच भी देखने को मिल रहा है। कई वार्ड ऐसे हैं, जहां हार-जीत का अंतर बेहद कम रहने की संभावना है। इन्हीं कड़े मुकाबले वाली सीटों ने पूरे चुनावी रण को हाई-वोल्टेज बना दिया है। इस चुनाव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि कई वार्डों में राजनीतिक दिग्गजों के बेटे, रिश्तेदार और प्रभावशाली स्थानीय नेता आमने-सामने हैं। इससे चुनाव केवल दलों की नहीं, बल्कि राजनीतिक विरासत और व्यक्तिगत प्रभाव की भी परीक्षा बन गया है। इन वार्डों में कड़े मुकाबले, बागी उम्मीदवार और पारिवारिक राजनीति ने चुनाव को बेहद रोचक बना दिया है। 15 जनवरी को होने वाला मतदान तय करेगा कि इन हाई-प्रोफाइल सीटों पर किसकी रणनीति कामयाब होती है और किसे राजनीतिक झटका लगता है।वार्ड नौ: बनसोड़े बनाम खंदारेविधानसभा उपाध्यक्ष अण्णा बनसोड़े के पुत्र और राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार) सिद्धार्थ बनसोड़े और कांग्रेस के उमेश खंदारे के बीच सीधा संघर्ष है। वहां बनसोड़े परिवार की पकड़ बनाम कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक आमने-सामने है।वार्ड 24: बारणे परिवार की राजनीतिक जंगशिवसेना (शिंदे गुट) के सांसद श्रीरंग बारणे के पुत्र विश्वजीत बारणे (शिंदे सेना) और भाजपा के सिद्धेश्वर बारणे के बीच मुकाबला व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का बन गया है। इसी वार्ड में सांसद के भतीजे निलेश बारणे (शिंदे सेना) और गणेश गुजर (निर्दलीय-भाजपा समर्थित) के बीच मुकाबले ने समीकरण और जटिल कर दिए हैं।वार्ड 10: गोरेखे परिवार की साख दांव परविधान परिषद सदस्य अमित गोरेखे की माता अनुराधा गोरेखे (भाजपा) और एनसीपी-एपी की नीलिमा पवार-गायकवाड़ के बीच कड़ा संघर्ष है। वहां महिला नेतृत्व और संगठनात्मक ताकत की सीधी परीक्षा हो रही है।वार्ड सात: लांडे बनाम लोंढेपूर्व विधायक विलास लांडे के भतीजे विराज लांडे (एनसीपी-एपी) और स्थायी समिति के भूतपूर्व अध्यक्ष संतोष लोंढे (भाजपा) के बीच मुकाबला अनुभव बनाम नई पीढ़ी की राजनीति का प्रतीक बन गया है।वार्ड 28: काटे परिवार की दोहरी भिड़ंतवार्ड में एक नहीं, दो मुकाबले चर्चा में हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित गुट) के नाना काटे बनाम भाजपा के संदेश काटे (भाजपा) और भाजपा शहर अध्यक्ष शत्रुघ्न काटे बनाम राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार) के उमेश काटे। वहां पारिवारिक रिश्तों से ज्यादा राजनीतिक निष्ठाएं टकरा रही हैं।वार्ड 25: चचेरे भाइयों की चुनावी जंगचार बार चिंचवड़ विधानसभा चुनाव लड़ चुके राहुल कलाटे (भाजपा) और उनके सगे चचेरे भाई मयूर कलाटे (राष्ट्रवादी कांग्रेस अजित गुट) आमने-सामने हैं। यह मुकाबला पूरे शहर में सबसे ज्यादा चर्चित माना जा रहा है।वार्ड 32: त्रिकोणीय मुकाबले से बढ़ी धड़कनेंपूर्व महापौर माई ढोरे (भाजपा), भाजपा की बागी शारदा सोनवणे और राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित गुट) की उज्ज्वला ढोरे के बीच त्रिकोणीय लड़ाई ने परिणाम को पूरी तरह अनिश्चित बना दिया है।वार्ड 26: संगठन बनाम प्रभावराष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार गुट) के शहर अध्यक्ष तुषार कामठे और भाजप के संदीप कस्पटे के बीच सीधी टक्कर है। वहां पार्टी संगठन की मजबूती और स्थानीय प्रभाव का संतुलन निर्णायक होगा।


Source: Dainik Bhaskar January 10, 2026 10:49 UTC



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