हाइलाइट्स 2008 से कंपनी अपने कर्ज को छोटी-छोटी एंट्रीज के जरिए बहीखाते में अजस्ट कर रही थीPMC बैंक ने 21 हजार से ज्याद फेक अकाउंट खोले थे जिसकी मदद से HDIL के डिफॉल्ट को छिपाया गयाबैंक ने डमी अकाउंट की मदद से RBI को धोखे में रखा और बताता रहा है कि उसकी वित्तीय हालत ठीक हैवाधवान के वकील ने कहा कि HDIL सिक्यॉरिटी डिपॉजिट बेचकर कर्ज चुकाना चाहते थे मेरे क्लाइंटPMC बैंक के 4300 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच कर रही मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा(EoW) ने पाया कि एचडीआईएल करीब 10 साल से फर्जीवाड़ा कर रही थी। जांच में पता चला है कि साल 2008 से ही कंपनी गैरचुकता कर्ज को छोटी-छोटी एंट्रीज के जरिए बहीखाते में अजस्ट कर रही थी। फर्जीवाड़े के जरिए कंपनी ने रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज को कंपनी की सेहत को लेकर धोखे में रखा। ये सभी फर्जी खाते पीएमसी बैंक से लिए गए गैरचुकता कर्ज से संबंधित थे।इस बात का खुलासा पहले ही हो चुका है कि पीएमसी बैंक ने 21,000 फर्जी खाते खोले थे, जिनके जरिए एचडीआईएल के डिफॉल्ट को छिपाया गया। बैंक ने इन डिफॉल्ट्स को छिपाने के लिए डमी खाते खोलकर आरबीआई को धोखे में रखा और दिखाया की उसकी वित्तीय सेहत ठीक है। मामले की जांच के बाद अब यह भी संभावना जताई जा रही है कि एचडीआईएल भी इसी तरह से धोखा दे रही थी। पुलिस को शक है कि कंपनी ने हेरफेर का सहारा लेकर कंपनी की वित्तीय सेहत का सच छिपाया, जबकि कंपनी खस्ताहाल हो चुकी थी।बता दें कि शनिवार को EoW ने पीएमसी बैंक के पूर्व चेयरमैन वरयाम सिंह(68) को भी अरेस्ट कर लिया था और इस केस में यह चौथी गिरफ्तारी है। इससे पहले बैंक के पूर्व एमडी ज़य थॉमस, एचडीआईएल ग्रुप के प्रमोटर्स राकेश और सारंग वाधवान को अरेस्ट किया जा चुका था। सिंह और वाधवान को बुधवार को कोर्ट में पेश कर कस्टडी बढ़ाने की मांग की गई थी। पुलिस ने कस्टडी को 5 दिन और बढ़ाए जाने की मांग की थी ताकि सबूत जुटाए जा सकें।वाधवान के वकील अमित देसाई ने कोर्ट को बताया कि उनके क्लायंट्स जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने आगे बताया कि एचडीआईएल ने पीएमसी बैंक को लोन अगेन्स्ट प्रॉपर्टी के रूप में सिक्यॉरिटी डिपॉजिट दिए थे और बाद में वे प्रॉपर्टीज को बेचकर बैंक का कर्ज चुकाने का सोच रहे थे।एक पुलिस सूत्र ने बताया कि सिंह और उनके परिवार ने उस वक्त अमेरिका में निवेश किए जब घोटाला चरम पर था। पुलिस को शक है कि यह पैसा गलत तरीके से कमाया गया था। सूत्र ने आगे बताया कि सिंह डबल रोल निभा रहे थे। वह HDIL के बोर्ड में थे और बाद में PMC बैंक में चेयरमैन भी थे। जांच में पुलिस को यह भी पता चला कि पालघर और वसई के एचडीआईएल के कुछ प्रॉजेक्ट्स में वह पार्टनर भी थे। उनका दावा है कि सिंह और वाधवान जांच में पुलिस का सहयोग नहीं कर रहे थे।पुलिस को यह भी पता चला था कि एचडीआईएल ने बैंक ऑफ इंडिया का बकाया चुकाने के लिए पीएमसी बैंक से 90 करोड़ रुपये का कर्ज लिया। पुलिस ने कहा कि यह इस बात का एक उदाहरम है कि कैसे इन लोगों ने पीएमसी बैंक से लिए कर्ज का गलत इस्तेमाल किया।
Source: Navbharat Times October 10, 2019 04:23 UTC