Nobel Prize 2019 Winner In Chemistry: 97 साल की उम्र में गुडइनफ बने नोबेल विजेता, इस उम्र में भी रोज करते हैं काम - News Summed Up

Nobel Prize 2019 Winner In Chemistry: 97 साल की उम्र में गुडइनफ बने नोबेल विजेता, इस उम्र में भी रोज करते हैं काम


गुडइनफ आज भी करते हैं रोज कामहाइलाइट्स 97 साल की उम्र में जॉन बी. गुडइनफ को केमिस्ट्री का नोबेल, सबसे उम्रदराज नोबेल विजेता बनेगुडइनफ इस उम्र में भी रिटायर नहीं हुए और आज भी रोज नियमित तौर पर काम करते हैंलीथियम आयन बैटरी बनाने के लिए गुडइनफ को विज्ञान के क्षेत्र में यह प्रतिष्ठित सम्मान मिलागुडइनफ के साथ इस बार यह सम्मान 2 अन्य वैज्ञानिकों को भी संयुक्त तौर पर दिया जा रहा हैइस वक्त अगर आप यह खबर अपने लैपटॉप या मोबाइल फोन पर पढ़ रहे हैं तो आप जरूर रसायन विज्ञान (केमिस्ट्री) के 3 वैज्ञानिकों का शुक्रिया अदा करना चाहेगें। इन 3 वैज्ञानिकों को प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार मिला है। विज्ञान के क्षेत्र का यह प्रतिष्ठित सम्मान इन तीनों वैज्ञानिकों को लीथियम-आयन बैटरी की खोज के लिए मिला है। इस बैटरी का प्रयोग मोबाइल और लैपटॉप आदि में किया जाता है। सबसे खास बात तो यह है कि पुरस्कार पाने वालों में 97 साल के एक वैज्ञानिक भी हैं। यह पहली बार है जब इस उम्र के किसी वैज्ञानिक को नोबेल पुरस्कार मिला हो।97 साल के गुडइनफ नोबेल पुरस्कार पाने वाले सबसे उम्रदराज शख्स हैं। इससे पहले यह अवॉर्ड 96 साल की उम्र में ऑर्थर आस्किन को मिला था। आर्थर को पिछले साल 96 साल की उम्र में भौतिकी (फिजिक्स) के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार दिया गया था। गुडइनफ रसायन विज्ञान ही नहीं फिजिक्स के भी विद्वान हैं। 97 की उम्र में भी वह रोजाना काम करते हैं। गुडइनफ ने इस बारे में कहा, 'टेक्सस के बारे में यही तो अच्छी बात है कि वह आपको रिटायर नहीं करते। इसलिए मुझे अतिरिक्त 33 साल मिले जिनमें मैं अच्छा काम कर सका।'बुधवार को रसायन के नोबेल पुरस्कार की घोषणा की गई। इस बार यह पुरस्कार संयुक्त रूप से 3 वैज्ञानिकों को दिया जा रहा है। 97 साल के जॉन बी. गुडइनफ इस वर्ष के नोबेल पुरस्कार विजेता हैं। जर्मनी में पैदा हुए अमेरिकन इंजिनियर गुडइनफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सस में प्रफेसर के पद पर कार्यरत हैं। 77 साल के एम. स्टेनली विटिंगम ब्रिटिश-अमेरिकन वैज्ञानिक हैं। स्टेनली फिलहाल न्यू यॉर्क के स्टेट यूनिवर्सिटी में रसायन विज्ञान के प्रफेसर हैं। तीसरे वैज्ञानिक अकिरा योशिना 71 साल के हैं और वह केमिकल कंपनी अशाई कासाई कॉर्प और मेइजो यूनिवर्सिटी से जापान में जुड़े हुए हैं।इन तीनों वैज्ञानिकों को यह पुरस्कार विज्ञान और तकनीक की दुनिया में बड़े पैमाने पर बदलाव को मुमकिन बनाने के लिए दिया गया है। लीथियम बैटरी की खोज ने करोड़ों लोगों की रोजमर्रा के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाए हैं। इन तीनों वैज्ञानिकों की खोज का असर हर उस व्यक्ति पर पड़ा है जो मोबाइल फोन, पेसमेकर, इलेक्ट्रिक कार, कंप्यूटर जैसी चीजों का इस्तेमाल करता है। इन तीनों वैज्ञानिकों की उपलब्धि इसलिए भी शानदार है कि इन्होंने रीन्यूएबल स्रोतों के क्षेत्र में काम किया है। ग्लोबल वॉर्मिंग के संकट से जूझ रहे विश्व के लिए यह बहुत बड़ी राहत साबित हो सकती है।


Source: Navbharat Times October 10, 2019 03:35 UTC



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