Nagpur News: महाराष्ट्र में सौर ऊर्जा पर अघोषित प्रतिबंध ,गुप्त बदलाव ने बढ़ाई चिंता - News Summed Up

Nagpur News: महाराष्ट्र में सौर ऊर्जा पर अघोषित प्रतिबंध ,गुप्त बदलाव ने बढ़ाई चिंता


Nagpur News महाराष्ट्र में सौर ऊर्जा अपनाने वाले आवासीय और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए एक चिंताजनक खबर है। महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (महावितरण) ने अपनी नीति में एक ऐसा गुप्त बदलाव किया है, जिससे राज्य के लगभग 50-60% आवासीय सोलर उपभोक्ता सीधे तौर पर प्रभावित होंगे।13 फरवरी से लागू हुए इन नए बदलावों के अनुसार अब उपभोक्ताओं को उनकी इच्छा या भविष्य की जरूरतों के बजाय पिछले 12 महीनों की औसत बिजली खपत के आधार पर ही सोलर क्षमता की स्वीकृति दी जा रही है। इससे पहले, उपभोक्ता अपनी भविष्य की योजनाओं और आवश्यकता के अनुसार क्षमता चुनने के लिए स्वतंत्र थे। ऑल इंडिया रिन्यूएबल एनर्जी एसोसिएशन (एआईआरईए) के डायरेक्टर साकेत सूरी और एडवाइजर सुधीर बुधे ने महावितरण के यह फैसले को एकतरफा बताया है।आंदोलन में राज्य के 200 संगठन शामिल होंगे : उन्होंने कहा कि, यह फैसला प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना को संकट में डालने वाला है। उपभोक्ता पहले से ही भारी फिक्स्ड चार्ज देते हैं, ऐसे में उनके वैधानिक अधिकार का उल्लंघन करना अवैध है। साकेत सूरी ने बताया कि, यह मामला अब केंद्र स्तर तक पहुंच चुका है। जहां तक संभावना है कि, 1-2 दिन में महावितरण इसे वापस ले लेगी। यदि, इसे वापस नहीं लिया जाता है, तो सोमवार से राज्यभर में तीव्र आंदोलन किया जाएगा। इस आंदोलन में राज्य के 200 से ज्यादा संगठन हिस्सा लेंगेे।क्या है नया नियम, जिससे मचा बवाल : अब तक के नियमों के अनुसार उपभोक्ता अपनी स्वीकृत भार के अनुसार सोलर पैनल लगा सकते थे, लेकिन 13 फरवरी से लागू नए "सॉफ्टवेयर अपडेट' के बाद, अब सोलर क्षमता को पिछले 12 महीनों की औसत बिजली खपत के आधार पर सीमित कर दिया गया है। यदि, आपके पास 5 किलोवाट का लोड मंजूर है, लेकिन पिछले एक साल में आपका औसत उपयोग केवल 100 यूनिट रहा है, तो पोर्टल आपको केवल 1 किलोवाट का सोलर लगाने की अनुमति देगा। भले ही आप भविष्य में एसी लगाने या इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने की योजना बना रहे हों, आप अपनी जरूरत के अनुसार बड़ा सिस्टम नहीं लगा पाएंगे। यह कदम एमईआरसी विनियमन 6.2 और विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 7 एवं 9 का उल्लंघन बताया जा रहा है, जहां उत्पादन को लाइसेंस-मुक्त रखा गया है।महाराष्ट्र का बड़ा नुकसान : सूरी ने बताया कि, महाराष्ट्र वर्तमान में पीएम सूर्यघर योजना के तहत देश का सबसे बड़ा बाजार है, जहां प्रतिमाह 50,000 से अधिक घर सोलर अपना रहे हैं और देश के कुल योगदान में राज्य की हिस्सेदारी 25% है। विशेषज्ञों का मानना है कि, इस एकतरफा निर्णय से न केवल मौजूदा ऑर्डर रद्द होंगे, बल्कि प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किया गया यह महत्वाकांक्षी कार्यक्रम भी संकट में पड़ जाएगा।


Source: Dainik Bhaskar February 20, 2026 08:59 UTC



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