Nagpur News उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व की शिवसेना के विस्तार की रणनीति चर्चा में है। दावा किया जा रहा है कि मिशन लोकसभा के तहत शिवसेना में विभिन्न दलों के नेताओं का प्रवेश कराया जाएगा। विशेषकर शिवसेना उद्धव के सांसद, विधायक, नगरसेवक को शिंदे के नेतृत्व की सेना में शामिल कराने का प्रयास किया जा रहा है। इसे ऑपरेशन टाइगर कहा जा रहा है। रविवार 5 अप्रैल को देशपांडे सभागृह में पूर्व विदर्भ विभागीय पदाधिकारी सम्मेलन का आयोजन किया गया है। इसमें विभागीय संपर्क प्रमुख डॉ. दीपक सावंत, विभागीय संपर्क प्रमुख मनीषा कायंदे व नागपुर लोकसभा संपर्क प्रमुख संजय निरुपम प्रमुखता से शामिल होंगे। पदाधिकारियों को संगठन कार्य का डोज दिया जाएगा।पदाधिकारी सम्मेलन से शुरूआत : माना जा रहा है कि शिवसेना केे विभाजन के बाद शिंदे के नेतृत्व की शिवसेना का यह बड़ा पदाधिकारी सम्मेलन होगा। इसे ऑपरेशन टाइगर का हिस्से के रूप में ही देखा जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि नागपुर जिले में पुराने शिवसैनिकों को प्रमुखता के साथ शिवसेना शिंदे गुट में शामिल कराने की रणनीति पर काम किया जाएगा। सम्मेलन के नियोजन की जिम्मेदारी वित्त व नियोजन राज्यमंत्री आशीष जैस्वाल संभाल रहे हैं। विधानपरिषद सदस्य कृपाल तुमाने, विदर्भ विभागीय संगठक किरण पांडव, जिला प्रमुख सूरज गोजे सहित अन्य पदाधिकारी भी नियोजन कार्य में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।क्या है संभावना : शिवसेना के दोनाें गुट में भले ही पहले जैसा उत्साह नजर नहीं आ रहा है। चुनावी राजनीति में नागपुर व पूर्व विदर्भ में शिवसेना का प्रभाव अधिक नहीं दिख रहा है। लेकिन वरिष्ठ पदाधिकारियों काे संगठन का नेतृत्व मिलने से माना जा रहा है कि नए पुराने शिवसैनिकों को बड़ी संख्या में एकजुट किया जा सकता है। डॉ.दीपक सावंत पहले भी जिले में संपर्क प्रमुख रहे हैं। विशेषकर रामटेक क्षेत्र में उनका संगठन कार्य चर्चा में रहा है। उससे पहले संजय निरुपम भी नागपुर के संपर्क प्रमुख रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे, कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध मोहिते भी बतौर शिवसैनिक नागपुर जिले की राजनीति में प्रभावी भूमिका में रहे हैं। ठाकरे परिवार के दूत के तौर पर निरुपम व सावंत ने जिले में संगठन मामले में कई प्रयोग किये। अन्य दलों के नगरसेवकों व अन्य पदाधिकारियों का शिवसेना में प्रवेश कराया था। बदलती हुई राजनीतिक स्थिति में कई शिवसैनिकों ने शिवसेना छोड़ दी। अन्य दलों के कार्यकर्ताओं ने शिवसेना में प्रवेश लिया। फिलहाल शिवसेना के दाेनों गुट में पुराने शिवसैनिकों की कमी है। ऐसे में माना जा रहा है कि शिंदे के नेतृत्व की शिवसेना को मजबूत करने के लिए नये पुराने शिवसैनिकों से घर पहुंच संपर्क कर उन्हें संगठन से जोड़ने का काम किया जा सकता है।
Source: Dainik Bhaskar April 03, 2026 06:19 UTC